स्वर्ग की मिट्टी
स्वर्ग की मिट्टी एक पापी इन्सान मरते वक्त बहुत दुख और पीड़ा भोग रहा था। लोग वहाँ काफी संख्या में इकट्ठे हो गये। वहीं पर एक महापुरूष आ गये, पास खड़े लोगों ने महापुरूष से पूछा कि आप इसका कोई...
स्वर्ग की मिट्टी एक पापी इन्सान मरते वक्त बहुत दुख और पीड़ा भोग रहा था। लोग वहाँ काफी संख्या में इकट्ठे हो गये। वहीं पर एक महापुरूष आ गये, पास खड़े लोगों ने महापुरूष से पूछा कि आप इसका कोई...
कलयुग का दरोगा गरीब किसान के खेत में बिना बोये लौकी का पौधा उग आया। बड़ा हुआ तो उसमे तीन लौकियाँ लगीं। उसने सोचा, उन्हें बाजार में बेचकर घर के लिए कुछ सामान ले आएगा। अतः वो तीन लौकियाँ लेकर...
चंदन और कीचड़ एक दिन चंदन और कीचड़ का मिलन हो गया। दोनों अपनी-अपनी प्रशंसा के पुल बांधने लगे। चंदन बोला-‘भाई कर्दम ! मेरी बराबरी तू नहीं कर सकता । मेरी शीतलता से सारा संसार परिचित है। मेरे में इतनी...
मेरी छोटी बुआ रक्षाबंधन का त्यौहार पास आते ही मुझे सबसे ज्यादा जमशेदपुर (झारखण्ड )वाली बुआ जी की राखी के कूरियर का इन्तेज़ार रहता था! कितना बड़ा पार्सल भेजती थी बुआ जी! तरह-तरह के विदेशी ब्रांड वाले चॉकलेट,गेम्स, मेरे लिए...
कृष्णा हमारी पुकार सुन रहे है👂 मीरा जी जब भगवान कृष्ण के लिए गाती थी तो भगवान बड़े ध्यान से सुनते थे। सूरदास जी जब पद गाते थे तब भी भगवान सुनते थे। और कहाँ तक कहूँ कबीर जी ने...
भक्ति का सही समय दो बहनें चक्की पर गेहूं पीस रही थी, पीसते पीसते एक बहन गेहूं के दाने खा भी रही थी। दूसरी बहन उसको बीच बीच में समझा रही थी देख अभी मत खा घर जाकर आराम से...
स्वामी जी का उपदेश एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी - “जय जय रघुवीर समर्थ !” घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोलीमे भिक्षा डाली और कहा,...
मन मैला और तन को धोएं कुंभ स्नान चल रहा था। राम घाट पर भारी भीड़ लगी थी। शिव पार्वती आकाश से गुजरे। पार्वती जी ने इतनी भीड़ का कारण पूछा -आशुतोष ने कहा - कुम्भ पर्व पर स्नान करने...
गोपी और कृष्ण की अनोखी कथा ... एक गोपी एक वृक्ष के नीचे ध्यान लगा बैठ जाती है। कान्हा को सदा ही शरारतें सूझती रहती हैँ। कान्हा कभी उस गोपी को कंकर मारकर छेड़ते हैं कभी उसकी चोटी खींच लेते...
प्रेम भाव.. एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारे जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी! नौका डगमगा रही थी। कभी मंदिर नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न...