वाल्मीकि रामायण -भाग 52
वाल्मीकि रामायण -भाग 52 वानर-सेना में ऐसी भगदड़ देखकर सुग्रीव ने पूछा, “वानरों! किस कारण हमारी सेना इस प्रकार सहसा व्यथित हो उठी है?” तब अंगद ने उत्तर दिया, “क्या आप श्रीराम और लक्ष्मण की दशा नहीं देख रहे हैं?...
वाल्मीकि रामायण -भाग 52 वानर-सेना में ऐसी भगदड़ देखकर सुग्रीव ने पूछा, “वानरों! किस कारण हमारी सेना इस प्रकार सहसा व्यथित हो उठी है?” तब अंगद ने उत्तर दिया, “क्या आप श्रीराम और लक्ष्मण की दशा नहीं देख रहे हैं?...
वाल्मीकि रामायण -भाग 50 वह नाद सुनकर रावण ने कुछ सोच-विचार करके अपने मंत्रियों की ओर देखा। किसी का नाम लिए बिना उसने व्यंग्य करते हुए कहा, “आप लोगों ने राम के बल-पराक्रम की जो बातें बताई हैं, वे सब...
वाल्मीकि रामायण -भाग 49 तब श्रीराम ने सागर से कहा, “वरुणालय! मेरी बात सुनो। मेरा यह बाण खाली नहीं जा सकता। इसलिए पहले यह बताओ कि इसे कहाँ छोड़ा जाए।” इस पर सागर ने उत्तर दिया, “श्रीराम! मेरी उत्तर दिशा...
वाल्मीकि रामायण -भाग 48 अपने ही मन की बात हनुमान जी के मुख से सुनकर श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हो गए। उन्होंने कहा, “वानरों! विभीषण के विषय में मैं भी कुछ कहना चाहता हूँ। जो मित्रता की भावना लेकर मेरे पास...
वाल्मीकि रामायण -भाग 47 रावण की आज्ञा मिलने पर विभीषण ने हाथ जोड़कर कहा, “राजन्! सीता के रूप में आपने अपनी ही मृत्यु को बुला लिया है। इससे पहले कि उन वानरों के साथ श्रीराम लंका पर चढ़ाई कर दें,...
वाल्मीकि रामायण -भाग 46 फिर रावण के सेनापति प्रहस्त ने कहा, “महाराज! हम लोग देवता, दानव, गन्धर्व, पिशाच, पक्षी और नाग आदि सभी को पराजित कर सकते हैं, फिर उन दो मनुष्यों को हराना कौन-सी बड़ी बात है? हम लोग...
वाल्मीकि रामायण -भाग 45 यहाँ से युद्ध काण्ड आरंभ हो रहा है। हनुमान जी से पूरा वर्णन सुनने के बाद श्रीराम बोले, “हनुमान ने बहुत बड़ा कार्य किया है। इस भूमण्डल में ऐसा कार्य करने की बात कोई सोच भी...
वाल्मीकि रामायण -भाग 44 समुद्र को पार करके हनुमान जी महेन्द्रगिरि पर उतरे। अपने वानर-मित्रों से शीघ्र मिलने की उत्सुकता में उन्होंने बड़े तीव्र स्वर में गर्जना की। उसे सुनते ही जाम्बवान हर्ष से खिल उठे। तुरंत ही उन्होंने सब...
वाल्मीकि रामायण -भाग 43 सीता जी से विदा लेकर हनुमान जी उत्तर दिशा की ओर बढ़े। लेकिन कुछ दूर जाने पर उन्होंने विचार किया कि ‘सीता जी का पता तो मैंने लगा लिया, किन्तु शत्रु की शक्ति का पता लगाना...
वाल्मीकि रामायण -भाग 42सीता को अपने वश में करने का उन राक्षसियों को आदेश देकर रावण वहाँ से चला गया। उसके जाते ही सब भयंकर राक्षसियां सीता को घेरकर बैठ गईं। हरिजटा, विकटा, दुर्मुखी आदि राक्षसियाँ एक-एक करके अत्यंत कठोर...