करुणानिधान••••••
करुणा निधान•••••• एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था। उसमें तरह-तरह के फल लगते थे।उस बगीचे की सारी देख-रेख एक किसान अपने परिवार के साथ करता था। और वो किसान हर दिन बगीचे के ताजे फल लेकर राजा...
करुणा निधान•••••• एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था। उसमें तरह-तरह के फल लगते थे।उस बगीचे की सारी देख-रेख एक किसान अपने परिवार के साथ करता था। और वो किसान हर दिन बगीचे के ताजे फल लेकर राजा...
वाल्मीकि रामायण -भाग 61इसके बाद श्रीराम ने हनुमान जी से कहा, “हनुमान! समस्त सुखों, हाथी, घोड़ों और रथों से भरपूर समृद्ध राज्य मिलने पर किसका मन नहीं पलट सकता? अतः तुम शीघ्र जाकर अयोध्या की स्थिति का पता लगाओ। शृङ्गवेरपुर...
वाल्मीकि रामायण -भाग 60अब तक श्रीराम ने भी युद्ध का रोष त्याग दिया था और वे शान्त भाव से खड़े थे। उन्होंने मातलि को विदा किया और फिर प्रसन्नता से उन्होंने सुग्रीव को गले लगाया और सबके साथ वे वानर-सेना...
वाल्मीकि रामायण -भाग 59ऐसा कहकर उसने तलवार हाथ में उठा ली और पत्नी व मन्त्रियों से घिरा हुआ रावण उस स्थान पर जा पहुँचा, जहाँ सीता जी को रखा गया था। सीता जी को देखते ही वह उनका वध करने...
वाल्मीकि रामायण -भाग 58विभीषण की कड़वी बातें सुनकर इन्द्रजीत को बड़ा क्रोध आया। वह अपने रथ को आगे बढ़ाकर तुरंत सामने आ खड़ा हुआ। उसने अपने हाथों में धनुष-बाण उठा लिया था और उसका खड्ग एवं अन्य आयुध भी वहीं...
वाल्मीकि रामायण -भाग 57 यह सुनकर श्रीराम जोर-जोर से हँसते हुए बोले, “निशाचर! क्यों व्यर्थ डींग हाँकता है? दण्डकारण्य में जब मैंने तेरे पिता खर के साथ ही त्रिशिरा, दूषण व अन्य चौदह हजार राक्षसों का वध किया था, तो...
वाल्मीकि रामायण -भाग 56 तत्पश्चात उन्होंने श्रेष्ठ कैलास पर्वत, शिवजी के वाहन वृषभ तथा श्रेष्ठ ऋषभ पर्वत को भी देखा। इसके बाद उनकी दृष्टि उस उत्तम पर्वत पर पड़ी, जो सब प्रकार की औषधियों से चमक रहा था। वहाँ पहुँचकर...
वाल्मीकि रामायण -भाग 55देवान्तक के मारे जाने से त्रिशिरा को बड़ा क्रोध हुआ और उसने नील पर अपने पैने बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। महोदर भी एक हाथी पर सवार होकर आ गया और उसने भी नील पर बाणों...
वाल्मीकि रामायण -भाग 54द्विविद ने एक बड़ा पर्वत उठाकर कुम्भकर्ण की ओर फेंका। वह उस राक्षस तक नहीं पहुँचा, किन्तु उसकी सेना पर जाकर गिरा और उसने अनेक घोड़ों, हाथियों व राक्षसों को कुचल डाला। इससे कुपित होकर राक्षस-सेना के...
वाल्मीकि रामायण -भाग 53 सारी लंका चारों ओर से शत्रुओं से घिरी हुई थी। यह देखकर रावण ने सेनापति प्रहस्त से कहा, “वीर प्रहस्त! शत्रुओं ने नगर के अत्यंत निकट छावनी डाल रखी है, जिससे सारा नगर व्यथित हो उठा...