कृतघ्नता से बचें
कृतघ्नता से बचें किसी के द्वारा किये गये उपकार को भूल जाना दुनिया का सबसे निम्न कार्य है। कृतघ्न मनुष्य इस दुनिया में सबसे अभागा है। दुनिया में कई लोग ऐसे भी हैं, जिनका कितना भी भला कर दो पर...
कृतघ्नता से बचें किसी के द्वारा किये गये उपकार को भूल जाना दुनिया का सबसे निम्न कार्य है। कृतघ्न मनुष्य इस दुनिया में सबसे अभागा है। दुनिया में कई लोग ऐसे भी हैं, जिनका कितना भी भला कर दो पर...
ईमानदार-विक्रेता एक बार की बात है, दो विक्रेता राम और श्याम एक साथ दूर के एक शहर में आए। वे यहां वहां घूमकर हाथों से बने गहना बेचते थे। जब वे दोनों एक साथ शहर आए तो उन्होंने तय किया...
सीता द्वारा स्वयंवर का वर्णन एक बार दृढ़तापूर्वक उत्तम व्रत का पालन करने वाली देवी अनसूया ने अपने निकट बैठी हुई सीता से कोई परम प्रिय कथा सुनाने के लिये इस प्रकार पूछना आरम्भ किया -'सीते ! इन यशस्वी राघवेन्द्र...
आत्मनिरीक्षण- गठरी पर निगाह दो आदमी यात्रा पर निकले! दोनों की मुलाकात हुई, दोनों का गंतव्य एक था तो दोनों यात्रा में साथ हो चले। सात दिन बाद दोनों के अलग होने का समय आया तो एक ने कहा: भाई...
अभिमन्यु महाभारत का युद्ध महज एक ऐतिहासिक संघर्ष नहीं था, बल्कि यह वीरता, बलिदान और त्रासदी की अनगिनत कहानियों का संग्रह है। इनमें से एक सबसे दर्दनाक और हृदयविदारक घटना अभिमन्यु की मृत्यु से संबंधित है। अभिमन्यु, जो अर्जुन और...
आज से लगभग 12 हजार वर्ष पूर्व त्रेता युग में अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट महाराज दिलीप के कोई संतान नहीं थी। एक बार वे अपनी पत्नी के साथ गुरु वसिष्ठ के आश्रम गए। गुरु वसिष्ठ ने उनके अचानक आने का...
ईश्वर की सच्ची भक्ति एक पुजारी थे,जो हमेशा ईश्वर की भक्ति में लीन रहते और सबसे मीठा बोलते थे। सबका खूब सम्मान करते। जो जैसा देता है वैसा उसे मिलता है। लोग भी उन्हें अत्यंत श्रद्धा एवं सम्मान भाव से...
शिवि की धर्मपरायणता दयालुता और वचनबद्धता से इंसान भगवान को भी वश में कर सकता है, कबूतर के बदले अपना शरीर दान करके शिवि ने इंद्र और अग्नि को जीत लिया। शिवि की धर्मपरायणता, उदराता, दयालुता एवं परोपकार की ख्याति...
श्रीराम का भ्रातृ-स्नेह राजा जनक के आमंत्रण पर मुनि विश्वामित्र श्रीराम एवं लक्ष्मण को साथ लेकर जनकपुर में ऋषियों के निवास - स्थान पर ठहरे हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि जब भी कोई किसी नए स्थान पर पहुंचता...
विश्वविजेता- गुकेश दूबे बेटा चौथी कक्षा में पढ़ रहा था, तभी शिक्षक ने पिता को बताया कि आपका बेटा बहुत बढ़िया शतरंज खेलता है। यदि इसे खेलने दिया जाय तो बहुत आगे जाएगा...पिता बड़े डॉक्टर थे, माता भी डॉक्टर। हमारे...