ईमानदारी का इनाम
ईमानदारी का इनाम पुराने समय की बात है। एक गरीब आदमी अपने राज्य में राह चलते हुए एक कपड़े की पोटली पाता है। पोटली खोलने पर उसमें 50 सोने के सिक्के और एक चिट्ठी मिलती है। चिट्ठी में लिखा होता...
ईमानदारी का इनाम पुराने समय की बात है। एक गरीब आदमी अपने राज्य में राह चलते हुए एक कपड़े की पोटली पाता है। पोटली खोलने पर उसमें 50 सोने के सिक्के और एक चिट्ठी मिलती है। चिट्ठी में लिखा होता...
सुनार की तकदीर एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गाँवों में घूम रहा था। घूमते-घूमते उसके कुर्ते के सोने के बटन की झालर टूट गई, उसने अपने मंत्री से पूछा, कि इस गांव...
निष्ठा पूर्वक कर्म कौशिक नामक एक बड़ा तपस्वी था। तप के प्रभाव से उसमें बहुत आत्मबल आ गया था। एक दिन वह वृक्ष के नीचे बैठा हुआ था कि ऊपर बैठी हुई चिड़िया ने उस पर बीट कर दी। कौशिक...
विचित्र आतिथ्य महर्षि दुर्वासा अपने क्रोध के लिए तीनों लोक में विख्यात हैं। एक बार वे चंवर लिए, जटा बढ़ाये, बिल्वदण्ड लिये तीनों लोकों में घूम-घूमकर सभाओं में चौराहों पर चलते फिरते बोलते जा रहे थे। मैं दुर्वासा हूं, दुर्वासा,...
“रोम-रोम में कृष्ण" एक बार की बात है महाभारत के युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन द्वारिका गये पर इस बार रथ अर्जुन चलाकर के ले गये। द्वारिका पहुँचकर अर्जुन बहुत थक गये इसलिए विश्राम करने के लिए...
कल्पना-की-समझदारी जमींदार सुदेश की एक कन्या थी । उसका नाम कल्पना था । एक बार कल्पना सहेलियों के साथ खेल रही थी । बातों-बातों में उसने सहेलियों से कहा ,‘‘मैं उसी लड़के के साथ शादी करूंगी जो हमेशा मेरा कहना...
मान सम्मान अनुराधा जी बहुत खुश थी जब उन्होंने सुना कि उनकी बेटी नताशा के बेटे वरुण का विवाह एक महीने बाद होने वाला है। लेकिन साथ ही, वे मायरे की तैयारी को लेकर चिंतित भी थीं। अनुराधा जी के...
सतत् सुमिरन एक ऋषि लोटा रोज मांजते थे, एक शिष्य ने उनसे कहा कि गुरुवर लोटे को रोज माँजने की क्या जरूरत है सप्ताह में एक बार माँज लिया करें..ऋषि ने कहा बात तो सही है और फिर उसके बाद...
राम मुस्कुराकर रह गए शबरी को आश्रम सौंपकर महर्षि मतंग जब देवलोक जाने लगे, तब शबरी भी साथ जाने की जिद करने लगी। शबरी की उम्र दस वर्ष थी। वो महर्षि मतंग का हाथ पकड़ रोने लगी। महर्षि शबरी को...
कथावाचक- पूज्यनीय रामचंद्र डोंगरे जी महाराज एक ऐसे कथावाचक जिनके पास पत्नी के अस्थि विसर्जन तक के लिए पैसे नहीं थे ...तब मंगलसूत्र बेचने की बात की थी। यह जानकर सुखद आश्चर्य होता है कि पूज्यनीय रामचंद्र डोंगरे जी महाराज...