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असली रिश्ता

असली रिश्तापत्नी को लड़कर पीहर गए पांच दिन हो गए थे। सतीश को नींद नही आ रही थी। वह करवटें बदल रहा था। रात के एक बजे पत्नी का फोन आया। उसने तुरंत उठा लिया। फोन उठाते ही राधिका बोली...

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कितने हुए श्री राम ?

कितने हुए श्री राम ? एक दिन श्री राम सिंहासन पर विराजमान थे तभी उनकी अंगूठी गिर गई। गिरते ही वह भूमि के एक छेद में चली गई। हनुमान ने यह देखा तो उन्होंने लघु रूप धरा और उस छेद...

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खुद की कमियों को ढूँढे़

खुद की कमियों को ढूँढे़ कबूतर के एक जोड़े ने अपने लिए घोंसला बनाया परंतु जब कबूतर जोड़ें उस घोंसले में रहते हैं तो अजीब बदबू आती रहती थी। उन्होंने उस घोंसले को छोड़ कर दूसरी जगह एक नया घोंसला...

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स्वर्ग और नरक का रहस्य

स्वर्ग और नरक का रहस्य बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक बुजुर्ग महिला रहती थीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन प्रभु की भक्ति में समर्पित कर दिया था। प्रतिदिन सुबह और शाम वे प्रभु का ध्यान करतीं,...

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फ़र्ज़

फ़र्ज पिताजी के जाने के बाद आज पहली बार हम दोनों भाईयों में जम कर बहसबाजी हुई। फ़ोन पर ही उसे मैंने उसे खूब खरी-खरी सुना दी। पुश्तैनी घर छोड़कर मैं कुछ किलोमीटर दूर इस सोसायटी में रहने आ गया...

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आस्था की अग्नि

“आस्था की अग्नि” विंध्याचल पर्वत की तलहटी में बसा “श्रीवन” गाँव कभी हरियाली से भरा था। खेतों में सुनहरी फसलें लहराती थीं, पर अब वहाँ सूखा पड़ गया था। जलस्रोत सूख चुके थे, और गाँव के लोग निराश हो चुके...

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कृष्ण सदा सहायते

कृष्ण सदा सहायते वृंदावन में एक बार एक ग्वाला कृष्ण के प्रति बहुत प्रेम रखता था। उसका नाम माधव था। माधव बहुत साधारण व्यक्ति था, पर उसका हृदय श्रीकृष्ण के लिए अपार भक्ति से भरा हुआ था। माधव रोज़ सुबह...

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खीर की प्रसादी

खीर की प्रसादी बरसाना में श्री रूप गोस्वामी चैतन्य महाप्रभु के छः शिष्यों में से एक थे। एक बार भ्रमण करते-करते अपने चेले जीव गोस्वामी जी के यहाँ बरसाना आए।जीव गोस्वामी जी ठहरे फक्कड़ साधू। फक्कड़ साधू को जो मिल...

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कर्म फल भोगना पड़ता है

कर्म फल भोगना पड़ता है एक बार लक्ष्मी और नारायण धरा (पृथ्वी) पर घूमने आए, कुछ समय घूम कर वो विश्राम के लिए एक बगीचे में जाकर बैठ गए। नारायण आंख बंद कर लेट गए, लक्ष्मी जी बैठ कर नज़ारे...

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निर्मल हृदय की दीपावली

निर्मल हृदय की दीपावली कार्तिक अमावस्या की रात थी। आकाश में न तारा चमक रहा था, न चाँद की किरणें थीं—चारों ओर केवल गहरा, अंधकार फैला हुआ था। सारे जीव जैसे किसी मौन पूजा में लीन थे। ऐसी शुभ रात्रि...

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