lalittripathi@rediffmail.com

Quotes

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-165

जय श्री राधे कृष्ण ……. "बिरह अगिनि तनु तूल समीरा, स्वास जरइ छन माहिं सरीरा, नयन स्त्रवहिं जलु निज हित लागी, जरैं न पाव देह बिरहागी ।। भावार्थ:- विरह अग्नि है, शरीर रुई है, और श्वास पवन है, इस प्रकार...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-164

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अवगुन एक मोर मैं माना, बिछुरत प्रान न कीन्ह पयाना, नाथ सो नयनन्हि को अपराधा, निसरत प्रान करहिं हठि बाधा ।। भावार्थ:- हाँ, एक दोष मैं अपना अवश्य मानती हूँ कि आपका वियोग होते ही...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-163

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अनुज समेत गहेहु प्रभु चरना, दीन बन्धु प्रनतारति हरना, मन क्रम बचन चरन अनुरागी, केहिं अपराध नाथ हौं त्यागी ।। भावार्थ:- छोटे भाई समेत प्रभु के चरण पकड़ना (और कहना कि) आप दीनबन्धु हैं, शरणागत...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-162

जय श्री राधे कृष्ण ……. "चलत मोहि चूड़ामणि दीन्ही, रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही, नाथ जुगल लोचन भरि बारी, बचन कहे कछु जनक कुमारी ।। भावार्थ:- चलते समय उन्होंने मुझे चूड़ामणि (उतार कर) दी । श्री रघुनाथ जी ने उसे...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-161

जय श्री राधे कृष्ण ……. "नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट, लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट ।। भावार्थ:- (हनुमान जी ने कहा), आप का नाम रात-दिन पहरा देने वाला है, आप का ध्यान ही किंवाड़ है...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-160

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनत कृपानिधि मन अति भाए, पुनि हनुमान हरषि हियँ लाए, कहहु तात केहि भाँति जानकी, रहति करति रच्छा स्वप्रान की ।। भावार्थ:- (वे चरित्र) सुनने पर कृपानिधि श्री रामचन्द्र जी के मन को बहुत ही...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-159

जय श्री राधे कृष्ण ……. "नाथ पवनसुत कीन्हि जो करनी, सहसहुँ मुख न जाइ सो बरनी, पवनतनय के चरित सुहाए, जामवंत रघुपतिहि सुनाए ।। भावार्थ:- हे नाथ! पवन पुत्र हनुमान ने जो करनी की, उसका हजार मुखों से भी वर्णन...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-158

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सोइ बिजई बिनई गुन सागर, तासु सुजसु त्रैलोक उजागर, प्रभु कीं कृपा भयउ सबु काजू, जन्म हमार सुफल भा आजू ।। भावार्थ:- वही विजयी है, वही विनयी है और वही गुणों का समुद्र बन जाता...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-157

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जामवंत कह सुनु रघुराया, जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया, ताहि सदा सुभ कुसल निरंतर, सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर !! भावार्थ:- जामवंत ने कहा - हे रघुनाथ जी! सुनिए । हे नाथ !...

Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-156

जय श्री राधे कृष्ण ……. "प्रीति सहित सब भेंटे रघुपति करुना पुंज, पूछी कुसल नाथ अब कुसल देखि पद कंज ।। भावार्थ:- दया की राशि श्री रघुनाथ जी सबसे प्रेम सहित गले लग कर मिले और कुशल पूछी । वानरों...

1 81 82 83 149
Page 82 of 149