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वाल्मीकि रामायण भाग 13

वाल्मीकि रामायण भाग 13रात बीती और पुष्य नक्षत्र में राज्याभिषेक का शुभ मुहूर्त आ गया। अपने शिष्यों के साथ महर्षि वसिष्ठ राज्याभिषेक की आवश्यक सामग्री लेकर राजा दशरथ के अंतःपुर में पहुंचे। उन्होंने मंत्री सुमन्त्र से कहा, "सूत! तुम शीघ्र...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-298

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत सभय मन मुख मुसकाई, कहत दसानन सबहि सुनाई, भूमि परा कर गहत अकासा, लघु तापस कर बाग बिलासा ।। भावार्थ:- पत्रिका सुनते ही रावण मन में भयभीत हो गया, परंतु मुख से (ऊपर से)...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-297

जय श्री राधे कृष्ण ….. "बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस, राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस ।। भावार्थ:- (पत्रिका में लिखा था) अरे मूर्ख ! केवल बातों से ही मन को रिझा कर अपने कुल...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-296

जय श्री राधे कृष्ण ….. "*रामानुज दीन्हीं यह पाती, नाथ बचाइ जुडा़वहु छाती, बिहसि बाम कर लिन्हीं रावन, सचिव बोलि सठ लाग बचावन ।। भावार्थ:- (और कहा) श्री राम जी के छोटे भाई लक्ष्मण ने यह पत्रिका दी है ।...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-295

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सचिव सभीत बिभीषन जाकें, बिजय बिभूति कहाँ जग ताकें, सुनि खल बचन दूत रिस बाढ़ी, समय बिचारि पत्रिका काढ़ी ।। भावार्थ:- जिसके विभीषण जैसा डरपोक मंत्री हो, उस के लिए संसार में विजय और विभूति...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-294

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सहज भीरु कर बचन दृढा़ई, सागर सन ठानी मचलाई, मूढ़ मृषा का करसि बड़ाई, रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई ।। भावार्थ:- स्वाभाविक ही डरपोक विभीषण के वचन को प्रमाण करके उन्होंने समुद्र से मचलना...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-293

जय श्री राधे कृष्ण ….. "तासु बचन सुनि सागर पाहीं, मागत पंथ कृपा मन माहीं, सुनत बचन बिहसा दससीसा, जौं असि मति सहाय कृत कीसा ।। भावार्थ:- उनके (आपके भाई) के वचन सुन कर वे (श्री राम जी) समुद्र से...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-292

जय श्री राधे कृष्ण ….. "राम तेज बल बुधि बिपुलाई, सेष सहस सत सकहिं न गाई, सक सर एक सोषि सत सागर, तव भ्रातहिं पूँछेउ नय नागर ।। भावार्थ:- श्री रामचंद्र जी के तेज (सामर्थ्य) बल और बुद्धि की अधिकता...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-291

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम, रावन काल कोटि कहुँ जीति सकहिं संग्राम ।। भावार्थ :- सब वानर - भालू सहज ही शूरवीर हैं, फिर उनके सिर पर प्रभु (सर्वेश्वर) श्री...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-290

जय श्री राधे कृष्ण ….. "मर्दि गर्द मिलवहिं दससीसा, ऐसहि बचन कहहिं सब कीसा, गर्जहिं तर्जहिं सहज असंका, मानहुँ ग्रसन चहत हहिं लंका ।। भावार्थ:- और रावण को मसल कर धूल में मिला देंगे। सब वानर ऐसे ही वचन कह...

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