सुविचार-सुन्दरकाण्ड-84
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सो मनु सदा रहत तोहि पाही, जानु प्रीति रसु एतनेहि माहीं, प्रभु सन्देसु सुनत बैदेही, मगन प्रेम तन सुधि नहिं तेही……!! भावार्थ:- और वह मन सदा तेरे ही पास रहता है। बस मेरे प्रेम का...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सो मनु सदा रहत तोहि पाही, जानु प्रीति रसु एतनेहि माहीं, प्रभु सन्देसु सुनत बैदेही, मगन प्रेम तन सुधि नहिं तेही……!! भावार्थ:- और वह मन सदा तेरे ही पास रहता है। बस मेरे प्रेम का...
जय श्री राधे कृष्ण ……. " दुनिया के तानों से कभी नाराज मत होना, अनजान लोग तो हीरे को भी कांच समझ लेते हैं…!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
जय श्री राधे कृष्ण ……. "कहेहू ते कछु दुख घटि होई, काहि कहौं यह जान न कोई, तत्व प्रेम कर मम अरु तोरा, जानत प्रिया एकु मनु मोरा…..!! भावार्थ:- मन का दुख कह डालने से भी कुछ घट जाता है।...
देश की राजनीति में भी स्वर्गीय रामचंद्र परमहंस दास का दबदबा बना रहता था. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई श्री रामचंद्र परमहंस दास के निधन पर अयोध्या के सरयू तट पर जाकर उनको श्रद्धांजलि दिए थे. परमहंस दास जी के...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "कुबलय बिपिन कुंत बन सरिसा, बारिद तपत तेल जनु बरिसा, जे हित रहे करत तेई पीरा, उरग स्वास सम त्रिबिध समीरा…..!! भावार्थ:- और कमलों के वन भालों के वन के समान हो गए हैं ।...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "कहेउ राम बियो तव सीता, मो कहु सकल भए बिपरीता, नव तरु किसलय मनहुँ कृसानू, कालनिसा सम निसि ससि भानू…..!! भावार्थ:- (हनुमान जी बोले), श्री रामचंद्र जी ने कहा है कि हे सीते! तुम्हारे वियोग...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "रघुपति कर संदेसु अब सुनु जननी धरि धीर, अस कहि कपि गदगद भयउ भरे बिलोचन नीर….!! भावार्थ:- हे माता! अब धीरज धर कर श्री रघुनाथ जी का संदेश सुनिए। ऐसा कह कर हनुमान जी प्रेम...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "मातु कुसल प्रभु अनुज समेता, तव दुख दुखी सुकृपा निकेता, जनि जननी मानहु जिय ऊना, तुम्ह ते प्रेमु राम कें दूना….!! भावार्थ:- हे माता ! सुंदर कृपा के धाम प्रभु भाई लक्ष्मण जी के सहित...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "बचनु न आव नयन भरे बारी, अहह नाथ हौं निपट बिसारी, देखि परम बिरहाकुल सीता, बोला कपि मृदु बचन बिनीता…..!! भावार्थ:- (मुंह से) वचन नहीं निकलता, नेत्रों में (विरह के आंसुओं का) जल भर आया...
आचार्य धर्मेंद्र का पूरा जीवन हिंदी, हिंदुत्व और हिन्दुस्तान के उत्कर्ष के लिए समर्पित रहा। अपने पिता महात्मा रामचन्द्र वीर महाराज के समान उन्होंने भी अपना सम्पूर्ण जीवन भारत माता और उसकी संतानों की सेवा में, अनशनों, सत्याग्रहों, जेल यात्राओं,...