राम’ नाम का रहस्य
राम’ नाम का रहस्य 'राम‘ सिर्फ एक नाम नहीं। राम मात्र दो अक्षर नहीं। राम हमारी सांस्कृतिक विरासत है। राम हमारी की एकता और अखंडता हैं। राम हमारी आस्था और अस्मिता के सर्वोत्तम प्रतीक हैं। राम सनातन धर्म की पहचान...
राम’ नाम का रहस्य 'राम‘ सिर्फ एक नाम नहीं। राम मात्र दो अक्षर नहीं। राम हमारी सांस्कृतिक विरासत है। राम हमारी की एकता और अखंडता हैं। राम हमारी आस्था और अस्मिता के सर्वोत्तम प्रतीक हैं। राम सनातन धर्म की पहचान...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "अपनी स्वयं की क्षमता से कार्य करना चाहिए , अन्य लोगों की निर्भरता का त्याग तत्काल कर देना चाहिए….!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
जय श्री राधे कृष्ण ……. "कह सीता बिधि भा प्रतिकूला, मिलिहि न पावक मिटिहि न सूला, देखिअत प्रगट गगन अंगारा, अवनि न आवत एकउ तारा….!! भावार्थ:- सीता जी (मन ही मन) कहने लगीं - (क्या करूं) विधाता ही विपरीत हो...
लक्ष्मण जी के त्याग की अदभुत कथा - एक अनजाने सत्य से परिचय -हनुमानजी की रामभक्ति की गाथा संसार में भर में गाई जाती है। लक्ष्मणजी की भक्ति भी अद्भुत थी. लक्ष्मणजी की कथा के बिना श्री रामकथा पूर्ण नहीं...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनत बचन पद गहि समुझाएसि, प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि, निसि न अनल मिल सुनु सुकुमारी, अस कहि सो निज भवन सिधारी…..!! भावार्थ:- सीता जी के वचन सुन कर त्रिजटा ने चरण पकड़ कर उन्हें...
कैसे आते हैं श्रीराम उस घने वन में एक ओर सीधे सादे भीलों की बस्तियां होतीं थीं, तो दूसरी ओर तपस्वी ऋषियों के आश्रम! प्रकृति द्वारा निर्मित व्यवस्था के अनुसार जीवन यापन करने वाले ये मानव चुपचाप अपनी परम्पराओं के...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "आनि काठ रचु चिता बनाई, मातु अनल पुनि देहि लगाई, सत्य करहि मम प्रीति सयानी, सुनै को श्रवन सूल सम वानी…..!! भावार्थ:- काठ लाकर चिता बना कर सजा दे। हे माता! फिर उसमें आग लगा...
फिर चौदह वर्ष बाद गहे भरत पुनि प्रभु पद पंकज, नमत जिनहिं सुर मुनि संकर अज।( श्रीरामचरितमानस ), मित्र ! क्षमा करें मैं अब अयोध्या के लिए प्रस्थान करना चाहता हूँ । श्रीराम ने जब विभीषण से ये कहा, तब...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जहँ तहँ गईं सकल तब सीता कर मन सोच, मास दिवस बीतें मोहि मारिहि निसिचर पोच…..!! भावार्थ:- तब (इसके बाद) वे सब जहाँ तहाँ चलीं गईं । सीता जी मन में सोच करने लगीं कि...
मै यहीं रहूँगा- गिरिराज और गोवर्धन समुद्र पार जाने के लिए पुल के निर्माण का काम प्रगति पर था । राम की सेना उत्साह से फूली नहीं समा रही थी । भालू-वानर भाग-भागकर काम कर रहे थे । तभी एकाएक...