सुविचार-सुन्दरकाण्ड-277
जय श्री राधे कृष्ण ….. "तुरत नाइ लछिमन पद माथा, चले दूत बरनत गुन गाथा, कहत राम जसु लंकाँ आए, रावन चरन सीस तिन्ह नाए ।। भावार्थ:- लक्ष्मण जी के चरणों में मस्तक नवा कर श्री राम जी के गुणों...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "तुरत नाइ लछिमन पद माथा, चले दूत बरनत गुन गाथा, कहत राम जसु लंकाँ आए, रावन चरन सीस तिन्ह नाए ।। भावार्थ:- लक्ष्मण जी के चरणों में मस्तक नवा कर श्री राम जी के गुणों...
भगवान श्री कृष्ण को क्यों प्रिय है माखन-मिश्री माखन क्या है ? मन ही माखन है। भगवान को मन रूपी माखन का भोग लगाना है। क्योंकि भोग तो भगवान लगाते है भक्त तो प्रसाद ग्रहण करता है, इसलिए हम भोक्ता...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कहेहु मुखागर मूढ़ सन मम संदेसु उदार, सीता देइ मिलहु न त आवा कालु तुम्हार ।। भावार्थ:- फिर उस मूर्ख से जबानी यह मेरा उदार (कृपा से भरा हुआ) संदेश कहना कि सीता जी को...
सबके प्यारे भगवान श्रीकृष्ण 🕉️🚩 🚩🕉️अप्रत्याशित रूप से, चारों ओर दिव्य रोशनी थी, तेज रोशनी ने जेल के अंधेरे को दूर कर दिया, आप राजाओं के राजा के रूप में आए, हे कृष्ण। चारों ओर आनंद और ख़ुशी के अलावा...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "*सुनि लछिमन सब निकट बोलाए,दया लागि हँसि तुरत छोड़ाए,रावन कर दीजहु यह पाती, लछिमन बचन बाचु कुलघाती ।। भावार्थ:- यह सुन कर लक्ष्मण जी ने सब को निकट बुलाया। उन्हें बड़ी दया लगी। इससे हँस...
स्वर्ग की मिट्टी एक पापी इन्सान मरते वक्त बहुत दुख और पीड़ा भोग रहा था। लोग वहाँ काफी संख्या में इकट्ठे हो गये। वहीं पर एक महापुरूष आ गये, पास खड़े लोगों ने महापुरूष से पूछा कि आप इसका कोई...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "बहु प्रकार मारन कपि लागे, दीन पुकारत तदपि न त्यागे, जो हमार हर नासा काना, तेहि कोसलाधीस कै आना ।। भावार्थ:- वानर उन्हें बहुत तरह से मारने लगे। वे दीन होकर पुकारते थे । फिर...
कलयुग का दरोगा गरीब किसान के खेत में बिना बोये लौकी का पौधा उग आया। बड़ा हुआ तो उसमे तीन लौकियाँ लगीं। उसने सोचा, उन्हें बाजार में बेचकर घर के लिए कुछ सामान ले आएगा। अतः वो तीन लौकियाँ लेकर...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह सुग्रीव सुनहु सब बानर, अंग भंग करि पठवहु निसिचर, सुनि सुग्रीव बचन कपि धाए, बांधि कटक चहु पास फिराए ।। भावार्थ:- सुग्रीव ने कहा - सब वानरो ! सुनो, राक्षसों के अंग भंग करके...
चंदन और कीचड़ एक दिन चंदन और कीचड़ का मिलन हो गया। दोनों अपनी-अपनी प्रशंसा के पुल बांधने लगे। चंदन बोला-‘भाई कर्दम ! मेरी बराबरी तू नहीं कर सकता । मेरी शीतलता से सारा संसार परिचित है। मेरे में इतनी...