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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-243

जय श्री राधे कृष्ण ….. "अस कहि करत दंडवत देखा, तुरत उठे प्रभु हरष बिसेषा, दीन बचन सुनि प्रभु मन भावा, भुज बिसाल गहि हृदयँ लगावा ।। भावार्थ:- प्रभु ने उन्हें ऐसा कह कर दण्डवत करते देखा तो वे अत्यन्त...

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परिपक्वता

परिपक्वता   परिपक्वता क्या है????   बहुत अच्छे से समझाया गया है ,कृपया अवश्य पढ़िए :--- 1. परिपक्वता वह है - जब आप दूसरों को बदलने का प्रयास करना बंद कर दे, इसके बजाय स्वयं को बदलने पर ध्यान केन्द्रित करें।...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-242

जय श्री राधे कृष्ण ….. "श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर,त्राहि त्राहि आरति हरन सरन सुखद रघुबीर ।। भावार्थ:- मैं कानों से आप का सुयश सुनकर आया हूँ कि प्रभु भव (जन्म-मरण) के भय का नाश करने वाले...

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जीवन में परेशानीयां तो लगी ही रहेंगी

जीवन में परेशानीयां तो लगी ही रहेंगी    एक व्यक्ति था. उसके पास नौकरी, घर-परिवार, रुपया-पैसा, रिश्तेदार और बच्चे सभी कुछ था। कहने का सार यह है उस व्यक्ति के पास किसी चीज़ की कोई कमी नही थी। अब जीवन...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-241

जय श्री राधे कृष्ण ….. "नाथ दसानन कर मैं भ्राता, निसिचर बंस जनम सुरत्राता, सहज पापप्रिय तामस देहा, जथा उलूकहि तम पर नेहा ।। भावार्थ:- हे नाथ ! मैं दशमुख रावण का भाई हूँ । हे देवताओं के रक्षक !...

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“हां….यही प्यार है….

"हां....यही प्यार है.... लीजिए आपका नींबू पानी.....मुस्कुराते हुए सुधा ने रोज की तरह मार्निंग वाक से लौटे अपने पति मोहन से कहा थैंक्स यार .... कहते हुए मोहन ने भी मुस्कुराते हुए नींबू पानी लिया और घट घट करते हुए...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-240

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सिंघ कंध आयत उर सोहा, आनन अमित मदन मन मोहा, नयन नीर पुलकित अति गाता, मन धरि धीर कही मृदु बाता ।। भावार्थ:- सिंह के से कंधे हैं, विशाल वक्ष:स्थल (चौड़ी छाती) अत्यन्त शोभा दे...

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मायका हमेशा सलामत रहे

मायका हमेशा सलामत रहे माँ के स्वर्ग सिधारने के बाद जब तेरहवी भी निमट गई तब नम आँखों से चारु ने अपने भाई से विदा ली।" सब काम निमट गये भैया माँ चली गई अब मैं चलती हूँ भैया !"...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-239

जय श्री राधे कृष्ण ….. "बहुरि राम छबिधाम बिलोकी, रहेउ ठटुकि एकटक पल रोकी, भुज प्रलंब कंजारुन लोचन, स्यामल गात प्रनत भय मोचन ।। भावार्थ:- फिर शोभा के धाम श्री राम जी को देख कर वे पलक (मारना) रोक कर...

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प्रेम और स्वास्थ्य

प्रेम और स्वास्थ्य आज हर मनुष्य को कोई ना कोई रोग लगा हुआ है । एक रोग का इलाज करवाते है तो दूसरा  रोग उठ खड़ा  होता है ।  रोग की  जड़ हमारे विचार  है ।  मुझे जल्दी सर्दी हो...

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