सुविचार-सुन्दरकाण्ड-159
जय श्री राधे कृष्ण ……. "नाथ पवनसुत कीन्हि जो करनी, सहसहुँ मुख न जाइ सो बरनी, पवनतनय के चरित सुहाए, जामवंत रघुपतिहि सुनाए ।। भावार्थ:- हे नाथ! पवन पुत्र हनुमान ने जो करनी की, उसका हजार मुखों से भी वर्णन...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "नाथ पवनसुत कीन्हि जो करनी, सहसहुँ मुख न जाइ सो बरनी, पवनतनय के चरित सुहाए, जामवंत रघुपतिहि सुनाए ।। भावार्थ:- हे नाथ! पवन पुत्र हनुमान ने जो करनी की, उसका हजार मुखों से भी वर्णन...
मायका और ससुराल "अरे सीमा तुमने मेहंदी नहीं लगाई, इस बार करवा चौथ पर तुम तो कितनी अच्छी मेहंदी लगाती थी....सोसाइटी की मेहंदी प्रतियोगिता तुम ही जीतती थी।" पड़ोस की रीना भाभी ने सीमा को देखते ही कहा….. "वो भाभी...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सोइ बिजई बिनई गुन सागर, तासु सुजसु त्रैलोक उजागर, प्रभु कीं कृपा भयउ सबु काजू, जन्म हमार सुफल भा आजू ।। भावार्थ:- वही विजयी है, वही विनयी है और वही गुणों का समुद्र बन जाता...
अब मैं पैसे नहीं रिश्ते कमाता हूँ- रिश्ते कमाता हूँ एक बार मैं अपने एक मित्र का तत्काल केटेगरी में पासपोर्ट बनवाने पासपोर्ट ऑफिस गया था। लाइन में लग कर हमने पासपोर्ट का तत्काल फार्म लिया, फार्म भरे हुए हमें...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जामवंत कह सुनु रघुराया, जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया, ताहि सदा सुभ कुसल निरंतर, सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर !! भावार्थ:- जामवंत ने कहा - हे रघुनाथ जी! सुनिए । हे नाथ !...
बेटी और बहू कांता देवी अपने सात साल के पोते के साथ क्रिकेट खेल रही थी। अंशु कह रहा था दादी आप बॉलिंग करो। "अंशु बेटा दादी तो बुढ़िया है। देखो ज्यादा नहीं दौड़ सकती।"…."दादी मैं जोर से नहीं मारूंगा"….दादी...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "प्रीति सहित सब भेंटे रघुपति करुना पुंज, पूछी कुसल नाथ अब कुसल देखि पद कंज ।। भावार्थ:- दया की राशि श्री रघुनाथ जी सबसे प्रेम सहित गले लग कर मिले और कुशल पूछी । वानरों...
अच्छे और बुरे लोगों की पहचान बहुत समय पहले की बात है। नदी के तट पर एक गांव बसा था और उसी के नजदीक एक संत का आश्रम था। एक बार संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "राम कपिन्ह जब आवत देखा, किएँ काजु मन हरष बिसेषा, फटिक सिला बैठे द्वौ भाई, परे सकल कपि चरनन्हि जाई ।। भावार्थ:- श्री राम जी ने जब वानरों को कार्य किए हुए आते देखा तब...
जय हनुमंत संत हितकारी दूसरों की संकट की घड़ी में संकट निवारक बन उनके संकटों को अपना संकट मानकर उसके निवारण के लिए प्राणों तक को दाँव पर लगा देना। श्री हनुमान जी महाराज का जीवन हमें सीख देता है।...