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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
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हर बड़ी कामयाबी समय मांगती है, इसलिए धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़े

हर बड़ी कामयाबी समय मांगती है, इसलिए धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़े !  गंगा जी को पृथ्वी पर लाने के लिए,राजा सगर फिर अंशुमान फिर दिलीप जी ने तपस्या की और वो असफल हुएं तब श्री दिलीप जी के...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-41

जय श्री राधे कृष्ण ……. कहहु कवन मैं परम कुलीना, कपि चंचल सबहीं बिधि हीना, प्रात लेइ जो नाम हमारा, तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा….!! भावार्थ:- भला कहिये, मै ही कौन बड़ा कुलीन हूँ ? (जाति का) चंचल वानर...

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तप का प्रभाव

तप का प्रभाव एक बार पृथ्वी पर जल-वृष्टि न होने के कारण चारों ओर अकाल फैला हुआ था| सरिता, ताल-तलैया और सरोवर सूख गए थे । कुओं में भी पानी नहीं रह गया था । कहीं भी हरियाली देखने को...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ……. *पिता कभी नहीं कहते कि मेरे पास पैसे नहीं है और मांँ कभी नहीं कहती कि आज मेरी तबियत खराब है बस इन्हीं दो झूठ की वजह से दुनियां इतनी सुंदर बनीं हुई है…!! सुप्रभात...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-40

जय श्री राधे कृष्ण ……. जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा, तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा, सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती, करहिं सदा सेवक पर प्रीती….!! भावार्थ:- जब श्री रघुवीर ने कृपा की है, तभी तो आपने मुझे हठ करके (अपनी...

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चरण स्पर्श

चरण स्पर्श चरण स्पर्श करने का वैज्ञानिक रहस्य जान जाओगे तो प्रतिदिन अपने बच्चों को यह सीख दोंगे। अपने से बड़ों का अभिवादन करने के लिए चरण छूने की परंपरा सदियों से रही है। भारतीय संस्कृति में अपने से बड़े...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-39

जय श्री राधे कृष्ण ……. तामस तनु कछु साधन नाहीं, प्रीति न पद सरोज मन माहीं, अब मोहि भा भरोस हनुमंता बिनु हरि कृपा मिलहि नहि संता…..!! भावार्थ:- मेरा तामसी (राक्षस) शरीर होने से साधन तो कुछ बनता नहीं, और...

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सकारात्मक” अभ्यास….

सकारात्मक" अभ्यास.... एक महिला और उसका पति एक सर्कस में काम करते थे। महिला स्टेज में एक जगह खड़ी हो जाती थी और पति बिना देखे (आंख पर पट्टी बांधकर) तीर उसकी ओर मारता था जिससे उसके चारो ओर तीरों...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-38

जय श्री राधे कृष्ण ……. सुनहु पवनसुत रहनि हमारी, जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी, तात कबहु मोहि जानि अनाथा, करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा…..!! भावार्थ:- विभीषण जी ने कहा, हे पवनपुत्र, मेरी रहनी सुनो । मैं यहां वैसे ही रहता हूँ,...

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पिता का स्वरुप

पिता का स्वरुप एक बार गणेश जी ने भगवान शिव जी से कहा,पिता जी ! आप यह चिता भस्म लगा कर मुण्डमाला धारण कर अच्छे नहीं लगते, मेरी माता गौरी अपूर्व सुन्दरी औऱ आप उनके साथ इस भयंकर रूप में...

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