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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-220

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सचिव संग लै नभ पथ गयऊ, सबहि सुनाइ कहत अस भयऊ ।। भावार्थ:- (इतना कह कर) विभीषण अपने मंत्रियों को साथ लेकर आकाश मार्ग में गए और सबको सुना कर वे ऐसा कहने लगे।। दो....

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सुखी वैवाहिक- जीवन साथी

सुखी वैवाहिक- जीवन साथी जरूर पढ़े आनन्द आएगा-  कॉलेज में सुखी वैवाहिक जीवन पर एक  कार्यक्रम हो रहा था, जिसमे कुछ शादीशुदा जोड़े हिस्सा ले रहे थे। जिस समय प्रोफेसर मंच पर आए । उन्होने नोट किया कि सभी पति-...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-219

जय श्री राधे कृष्ण ….. "उमा संत कइ इहइ बड़ाई, मंद करत जो करइ भलाई, तुम्ह पितु सरिस भलेहिं मोहि मारा, रामु भजें हित नाथ तुम्हारा ।। भावार्थ:- (शिव जी कहते हैं), हे उमा, संत की यही बड़ाई (महिमा) है...

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मानवता का गुण

मानवता का गुण एक किसान के पास बहुत पिल्ले थे तो वह कुछ पिल्लो को बेचना चाहता था. उसने घर के बाहर बिक्री का बोर्ड लगा दिया. एक दिन दस साल का बच्चा किसान के दरवाजे पर आया और बोला...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-218

जय श्री राधे कृष्ण ….. "मम पुर बसि तपसिन्ह पर प्रीती, सठ मिलु जाइ तिन्हहि कहु नीती, अस कहि कीन्हेसि चरन प्रहारा, अनुज गहे पद बारहिं बारा ।। भावार्थ:- मेरे नगर में रह कर प्रेम करता है तपस्वियों पर ।...

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हनुमानजी की अद्भुत पराक्रम कथा

हनुमानजी की अद्भुत पराक्रम कथा राम रावण युद्ध के समय जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने अपने 60 हजार अमर राक्षसों को बुलाकर रणभूमि में भेजने का आदेश दिया ! ये ऐसे थे जिनको काल...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-217

जय श्री राधे कृष्ण ….. "जिअसि सदा सठ मोर जिआवा, रिपु कर पच्छ मूढ़ तोहि भावा, कहसि न खल अस को जग माहीं, भुज बल जाहि जिता मैं नाहीं ।। भावार्थ:- अरे मूर्ख ! तू जीता तो है सदा मेरा...

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“यह एक शिक्षक के जीवन की अंतिम शाम थी”

"यह एक शिक्षक के जीवन की अंतिम शाम थी" एक शिक्षक के नाते इस कहानी को जरूर पढ़िएगा:- दिनकर सर .....अपने  विद्यार्थियों के बीच  काफी लोकप्रिय  एक सेवा निवृत शिक्षक।   3 दिन पूर्व ही  शहर के एक अस्पताल में इलाज...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-216

जय श्री राधे कृष्ण ….. "बुध पुरान श्रुति संमत बानी, कही बिभीषन नीति बखानी, सुनत दसानन उठा रिसाई, खल तोहिं निकट मृत्यु अब आई ।। भावार्थ:- विभीषण ने पंडितों, पुराणों और वेदों द्वारा सम्मत (अनुमोदित) वाणी से नीति बखान कर...

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जब जागो तभी सवेरा

जब जागो तभी सवेरा बड़े आक्रोश में घर में घुसते ही कावेरी को आँगन में काम करती हुई केया भाभी दिखाई पड़ीं पड़ी तो पूछा, "भाभी मम्मी किधर हैं?"……"अरे! दीदी प्रणाम। अचानक आगमन आपका! क्या बात है दीदी? न हाय...

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