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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-235

जय श्री राधे कृष्ण ….. "जग महुँ सखा निसाचर जेते, लछिमनु हनइ निमिष महुँ तेते, जौं सभीत आवा सरनाईं, रखिहउँ ताहि प्रान की नाईं।। भावार्थ:- क्योंकि हे सखे ! जगत में जितने भी राक्षस हैं, लक्ष्मण क्षण भर में उन...

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टीनू और चिड़िया के घोंसले

टीनू और चिड़िया के घोंसले एक समय की बात है, टीनू नाम की लड़की थी जो स्कूल में दिए गए कार्यों में बड़ी रुचि रखती थी। इस साल टीनू के स्कूल में गर्मी की छुट्टियां पड़ने से पहले उसकी टीचर...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-234

जय श्री राधे कृष्ण ….. "*निर्मल मन जन सो पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा, भेद लेन पठवा दससीसा, तबहुँ न कछु भय हानि कपीसा ।। भावार्थ:- जो मनुष्य निर्मल मन का होता है, वही मुझे पाता है ।...

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वाराणसी

वाराणसी गौरी का रिजर्वेशन जिस बोगी में था, उसमें लगभग सभी लड़के ही थे । टॉयलेट जाने के बहाने गौरी पूरी बोगी घूम आई, मुश्किल से दो या तीन औरतें होंगी । मन अनजाने भय से काँप सा गया ।...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-233

जय श्री राधे कृष्ण ….. "पापवंत कर सहज सुभाऊ, भजनु मोर तेहि भाव न काऊ, जौं पै दुष्ट हृदय सोइ होई, मोरें सनमुख आव कि सोई ।। भावार्थ:- पापी का यह सहज स्वभाव होता है कि मेरा भजन उसे कभी...

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इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया

एक ट्रेन द्रुत गति से दौड़ रही थी। ट्रेन अंग्रेजों से भरी हुई थी। उसी ट्रेन के एक डिब्बे में अंग्रेजों के साथ एक भारतीय भी बैठा हुआ था।डिब्बा अंग्रेजों से खचाखच भरा हुआ था। वे सभी उस भारतीय का...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-232

जय श्री राधे कृष्ण ….. "कोटि बिप्र बध लागहिं जाहू, आएँ सरन तजउँ नहिं ताहू, सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं, जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं ।। भावार्थ:- जिसे करोड़ों ब्राह्मणों की हत्या लगी हो, शरण में आने पर मैं उसे...

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“संवेदनशील होना कोई दुर्बलता नही”.

"संवेदनशील होना कोई दुर्बलता नही"… जीवन में आप चाहे जितने छले गए हो…. आपकी भावनाओं को चाहे जितना रौंदा गया हो। मगर आप अपने अंदर की करुणा और सच्चाई को अपनी कमजोरी समझ के छोड़ना नहीं। क्योंकि…. संवेदनशील होना कायरता...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-231

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना, सरनागत बच्छल भगवाना ।। भावार्थ:- प्रभु के वचन सुन कर हनुमान जी हर्षित हुए (और मन ही मन कहने लगे कि) भगवान कैसे शरणागत वत्सल (शरण में आए हुए पर...

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घमंडी का सिर नीचा

घमंडी का सिर नीचा प्राचीन काल की बात है।किसी गांव में चंद्रभूषण नाम का एक विद्धवान पंडित रहता था।उसकी वाणी में गजब का आकर्षण था।वह भागवत कथा सुनाने में निपुण था।उसकी वाणी से कथासार सुनकर लोग मुग्ध हो जाते थे।इसीलिए...

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