सुविचार-सुन्दरकाण्ड-232
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कोटि बिप्र बध लागहिं जाहू, आएँ सरन तजउँ नहिं ताहू, सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं, जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं ।। भावार्थ:- जिसे करोड़ों ब्राह्मणों की हत्या लगी हो, शरण में आने पर मैं उसे...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कोटि बिप्र बध लागहिं जाहू, आएँ सरन तजउँ नहिं ताहू, सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं, जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं ।। भावार्थ:- जिसे करोड़ों ब्राह्मणों की हत्या लगी हो, शरण में आने पर मैं उसे...
"संवेदनशील होना कोई दुर्बलता नही"… जीवन में आप चाहे जितने छले गए हो…. आपकी भावनाओं को चाहे जितना रौंदा गया हो। मगर आप अपने अंदर की करुणा और सच्चाई को अपनी कमजोरी समझ के छोड़ना नहीं। क्योंकि…. संवेदनशील होना कायरता...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना, सरनागत बच्छल भगवाना ।। भावार्थ:- प्रभु के वचन सुन कर हनुमान जी हर्षित हुए (और मन ही मन कहने लगे कि) भगवान कैसे शरणागत वत्सल (शरण में आए हुए पर...
घमंडी का सिर नीचा प्राचीन काल की बात है।किसी गांव में चंद्रभूषण नाम का एक विद्धवान पंडित रहता था।उसकी वाणी में गजब का आकर्षण था।वह भागवत कथा सुनाने में निपुण था।उसकी वाणी से कथासार सुनकर लोग मुग्ध हो जाते थे।इसीलिए...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "भेद हमार लेन सठ आवा, राखिअ बाँधि मोहि अस भावा, सखा नीति तुम्ह नीकि बिचारी, मम पन सरनागत भयहारी ।। भावार्थ:- (जान पड़ता है) यह मूर्ख हमारा भेद लेने आया है । इसलिए मुझे तो...
न माया मिली न राम किसी गाँव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम हीरा था और दूसरे का मोती। दोनों में गहरी दोस्ती थी और वे बचपन से ही खेलना-कूदना, पढना- लिखना हर काम साथ करते आ रहे...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा, vकहइ कपीस सुनहु नरनाहा, जानि न जाइ निसाचर माया, कामरुप केहि कारन आया ।। भावार्थ:- प्रभु श्रीराम जी ने कहा - हे मित्र! तुम क्या समझते हो (तुम्हारी क्या राय...
सदा सुहागन रहो मीना की दादी गांव से आई तो मीना की मां किरन ने जैसे अपनी सास के पैरों को हाथ लगाया तो उसकी सास ने किरन को "सदा सुहागन रहो" का आशीर्वाद दिया! यह सब मीना बहुत बार...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा, कहइ कपीस सुनहु नरनाहा, जानि न जाइ निसाचर माया, कामरुप केहि कारन आया ।। भावार्थ:- प्रभु श्रीराम जी ने कहा - हे मित्र! तुम क्या समझते हो (तुम्हारी क्या राय...
भक्ति-और-भगवान एक राजा था जो एक आश्रम को संरक्षण दे रहा था यह आश्रम एक जंगल में था इसके आकार और इसमें रहने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही थी और इसलिए राजा उस आश्रम के लोगों...