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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-265

जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह लंकेस सुनहु रघुनायक, कोटि सिंधु सोषक तव सायक, जद्यपि तदपि नीति असि गाई, बिनय करिअ सागर सन जाई ।। भावार्थ:- विभीषण जी ने कहा - हे रघुनाथ जी! सुनिये, यद्यपि आपका एक बाण ही...

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भाग्यशाली पश्चाताप

भाग्यशाली पश्चाताप घर का सारा कचरा इकट्ठा किया और बड़बड़ाती हुई बाहर निकली- 'संगीत के नाम पर बस अब यही आवाज शेष रह गई है जीवन में, बीस दिन हो गए स्पीकर खराब हुए,पर यहां किसी को कोई फर्क ही...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-264

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनु कपीस लंकापति बीरा, केहि बिधि तरिअ जलधि गंभीरा, संकुल मकर उरग झष जाती, अति अगाध दुस्तर सब भांती ।। भावार्थ:- हे वीर वानर राज सुग्रीव और लंकापति विभीषण ! सुनो, इस गहरे समुद्र को...

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पिता का सम्मान

पिता का सम्मानमनोहर जी जल्दी-जल्दी बिस्तर पर छूट गई पेशाब को साफ करने में लगे थे ताकि बहू-बेटा ना देख लें। कल ही तो बहू काजल ने नई चादर बिछाई थी और बेटे रवि को सुनाया था कि अगर पापा...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-263

जय श्री राधे कृष्ण ….. "पुनि सर्बग्य सर्ब उर बासी, सर्बरुप सब रहित उदासी, बोले बचन नीति प्रतिपालक, कारन मनुज दनुज कुल घालक ।। भावार्थ:- फिर सब कुछ जानने वाले, सबके हृदय में बसने वाले, सर्वरुप (सब रूपों में प्रकट),...

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सबसे बड़ा शिव भक्त भील कुमार

सबसे बड़ा भक्त भील कुमार एक पर्वत पर शिव जी का एक सुंदर मन्दिर था। यहाँ बहुत से लोग शिव जी की पूजा के लिए आते थे। उनमें दो भक्त एक ब्राह्मण और दूसरा एक भील, नित्य आने वालों में...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-262

जय श्री राधे कृष्ण ….. "अस प्रभु छाड़ि भजहिं जे आना, ते नर पसु बिनु पूंछ बिषाना, निज जन जानि ताहि अपनावा, प्रभु सुभाव कपि कुल मन भावा ।। भावार्थ:- ऐसे परम कृपालु प्रभु को छोड़ कर जो मनुष्य दूसरे...

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भाई चारा

भाईचारा महाभारत का प्रसंग है! जुए में हारने के बाद पाँच पांडव बारह वर्ष के वनवास के दिन वनों एवं पर्वतों में व्यतीत कर रहे थे! एक समय वे द्वैतवन के समीप ब्रह्मणों के साथ निवास कर रहे थे कि...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-261

जय श्री राधे कृष्ण ….. "रावन क्रोध अनल निज स्वास समीर प्रचंड, जरत बिभीषनु राखेउ दीन्हेउ राजु अखंड ।। भावार्थ:- श्री राम जी ने रावण के क्रोध रूपी अग्नि में जो अपनी (बिभीषण की) श्वास (वचन) रूपी पवन से प्रचंड...

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बेटा

बेटा नवविवाहिता पत्नी बार-बार अपनी सास पर आरोप लगाए जा रही थी और उसका पति बार-बार उसको अपनी हद में रहकर बोलने की बात कह रहा था। पत्नी थी कि चुप होने का नाम ही नही ले रही थी। जितनी...

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