सुविचार-सुन्दरकाण्ड-314
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ, जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ ।। भावार्थ:- समुद्र के अत्यंत विनीत वचन सुन कर कृपालु श्री राम जी ने मुस्कुरा कर कहा - हे...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ, जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ ।। भावार्थ:- समुद्र के अत्यंत विनीत वचन सुन कर कृपालु श्री राम जी ने मुस्कुरा कर कहा - हे...
वाल्मीकि रामायण -भाग 28 पंचवटी में जब शूर्पणखा ने देखा कि श्रीराम ने उन चौदह हजार राक्षसों के साथ-साथ खर, दूषण और त्रिशिरा को भी युद्ध में मार डाला है, तो वह बड़े शोक के साथ चीत्कार करने लगी। श्रीराम...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई, उतरिहि कटकु न मोरि बड़ाई, प्रभु आग्या अपेल श्रुति गाई, करौं सो बेगि जो तुम्हहि सोहाई ।। भावार्थ:- प्रभु के प्रताप से मैं सूख जाऊँगा और सेना पार उतर जाएगी,...
वाल्मीकि रामायण भाग 27 राम के हाथों खर के उन चौदह राक्षसों के वध को देखकर शूर्पणखा घबरा गई। भयभीत होकर वह पुनः खर के पास भागी। पुनः उसे रोता देख खर ने उससे पूछा, “बहन! तुम्हारी इच्छा पूरी करने...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं, मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं, ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी ।। भावार्थ:- प्रभु ने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा (दंड) दी, किंतु मर्यादा (जीवों का स्वभाव)...
वाल्मीकि रामायण भाग 26अगस्त्य जी के आश्रम में प्रवेश करके लक्ष्मण जी ने उनके शिष्य को अपना परिचय दिया और बताया कि ‘महाराज दशरथ के पुत्र श्रीराम अपनी पत्नी सीता के साथ महर्षि का दर्शन करने आए हैं।’ शिष्य ने...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "तव प्रेरित मायाँ उपजाए, सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए, प्रभु आयसु जेहि कहँ जस अहई, सो तेहि भांति रहें सुख लहई ।। भावार्थ:- आप की प्रेरणा से माया ने इन्हें सृष्टि के लिए उत्पन्न किया...
वाल्मीकि रामायण भाग 25महाभयंकर विराध राक्षस का वध करके श्रीराम ने सीता को सांत्वना दी और लक्ष्मण से कहा, “सुमित्रानन्दन! यह दुर्गम वन बड़ा कष्टप्रद है। हम लोग पहले कभी ऐसे वनों में नहीं रहे हैं, अतः यही अच्छा है...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सभय सिंधु गहि पद प्रभु केरे, छमहु नाथ सब अवगुन मेरे, गगन समीर अनल जल धरनी, इन्ह कइ नाथ सहज जड़ करनी ।। भावार्थ:- समुद्र ने भयभीत होकर प्रभु के चरण पकड़ कर कहा- हे...
वाल्मीकि रामायण भाग 24 श्रीरामजी की चरण-पादुकाओं को अपने सिर पर रखकर भरत शत्रुघ्न के साथ रथ पर बैठे। महर्षि वसिष्ठ, वामदेव, जाबालि आदि सब लोग आगे-आगे चले। चित्रकूट पर्वत की परिक्रमा करते हुए मन्दाकिनी नदी को पार करके वे...