नजरिया
दो पड़ोसन आपस में बातें कर रही थी। एक बोली “तुम अपने सास ससुर को कैसे अपने साथ रख लेती हो? मैं तो अपने सास ससुर को चार दिन भी नहीं झेल पाती। जब वो गांव से हमारे यहां आते हैं तब पूरे घर में बदबू फैल जाती है।”
दूसरी औरत बोली “बहन अपनी अपनी सोच है। मेरे घर में तो सास ससुर की वजह से ही खुशबू फैली रहती है। सुबह शाम सास मां पूजा करती है। इससे पूरे दिन हमारे घर में देवीय महक उठती रहती है।”
सास साथ है तो ऐसे लगता है मां साथ है। गलती पर जब वो डांटती है तो लगता है अभी मैं छोटी बच्ची हूं। बीमार होती हूं तब वो फिक्र करती है। हॉस्पिटल ले जाती है तब लगता है मां के पीछे पीछे चल रही हूं।
घर में ससुर के होते किसी तरह का डर नहीं लगता। एक छोटा सा खटका भी होता है तब वो जाग जाते हैं। और देखते हैं सब ठीक है न। मैं और मेरे पति उनके होते मजे की नींद सोते हैं।
ससुर घर के पलम्बर हैं, इलेक्ट्रिशियन हैं, चौकीदार हैं, और हमारे बच्चों के प्यारे दादा जी हैं। हमारे लिए वो सबकुछ हैं।
इतना सुनते ही पड़ोसन मुंह बनाते हुए चली गई।
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जय श्रीराम
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