lalittripathi@rediffmail.com
Quotes

अपने भीतर कृष्ण को जगाये

38Views

अपने भीतर कृष्ण को जगाए

श्रीकृष्ण का जन्म उस समय हुआ, जब चारों ओर भय था, अत्याचार था और धर्म संकट में था। यह केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि मनुष्य के अंतर्मन का भी एक गहरा संकेत है।

जब हमारे भीतर अज्ञान का अंधकार, अहंकार का कारागार और इच्छाओं का बंधन बढ़ जाता है, तब जीवन में कृष्ण के जन्म की आवश्यकता होती है।

कृष्ण का जन्म आधी रात में हुआ—मानो यह संदेश हो कि जब जीवन का अंधकार अपने चरम पर पहुँचता है, तभी भीतर ज्ञान का प्रकाश जन्म ले सकता है।

कृष्ण बाहर से आने वाले कोई व्यक्तित्व मात्र नहीं हैं; कृष्ण हमारे भीतर जागने वाली वह प्रज्ञा हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराना सिखाती है।

कृष्ण हमें कर्म से पलायन नहीं, निष्काम कर्म सिखाते हैं। वे संसार छोड़ने की नहीं, संसार में रहते हुए आसक्ति छोड़ने की प्रेरणा देते हैं।

वे युद्ध से बचने की नहीं, धर्म के लिए अपने भीतर के मोह, भय और दुर्बलता से युद्ध करने की शिक्षा देते हैं।

कृष्ण की बाँसुरी हमें बताती है कि जब अहंकार भीतर से खाली हो जाता है, तभी परमात्मा की धुन उस जीवन से निकलती है।

इस जन्माष्टमी पर केवल मंदिर में झाँकी न सजाएँ—अपने भीतर भी झाँकें।
देखें कि वहाँ कृष्ण के लिए स्थान है या नहीं।

जन्माष्टमी के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ

जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

Leave a Reply