सब अपने भाग्य का खाते है कोई किसी को नहीं खिलाता
नौकर ने ढाबे के मालिक से कहा, “मालिक, वह औरत जो उधर मंदिर के पास खड़ी है। कल खाना खाकर गई थी मगर पैसे नहीं देकर गई। देखिए आज भी भीड़ होने का इंतजार कर रही है। आज भी यह वही करने वाली है।
मालिक ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मैं उसे अच्छी तरह जानता हूँ बेटा, वो कचरा बीनने वाली गरीब औरत है। वह महीनों से ऐसा कर रही है, लेकिन तू उससे कभी पैसे मत माँगना, क्योंकि तू अभी नया है।”
नौकर हैरान होकर बोला, “मालिक, यह शिव ढाबा है, कोई भंडारा नहीं! ऐसे तो ढाबा बंद हो जाएगा।” मालिक ने नम्रता से सामने दिख रहे भोलेनाथ के मंदिर की ओर इशारा करते हुए कहा, “वह औरत रोज़ मंदिर के सामने खड़े होकर प्रार्थना करती है कि हे भोलेनाथ, ढाबे पर भीड़ कर दे ताकि मुझे भरपेट खाना मिल सके।
कौन जाने, मेरे ढाबे की यह रौनक उसी की दुआओं का असर हो ! सच तो यह है कि हर इंसान अपने भाग्य का खाता है, कोई किसी को नहीं खिलाता। तू बस अपना काम कर। और वो बिना पैसे दिए जाए तो उसे जाने देना।
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जय श्रीराम