ये दिल मांगे मोर
कारगिल युद्ध के दौरान विक्रम बत्रा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। पॉइंट 5140 पर कब्जे के दौरान उनके नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता दिखाई। इसी दौरान उनका प्रसिद्ध संदेश था—“ये दिल मांगे मोर!”
बाद में पॉइंट 4875 पर एक घायल अधिकारी को बचाने के प्रयास में कैप्टन बत्रा स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गए। अपने साथियों की जान बचाते हुए उन्होंने 7 जुलाई 1999 को सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
उनकी कहानी हमें सिर्फ यह नहीं सिखाती कि देश के लिए जान कैसे दी जाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि नेतृत्व का अर्थ सबसे आगे खड़े होकर अपने साथियों के लिए जोखिम उठाना है।
देशभक्ति केवल सीमा पर लड़ना नहीं है। जिस जिम्मेदारी को हम ईमानदारी से निभाते हैं, वह भी देशसेवा है। 🇮🇳
जय हिंद! 🇮🇳
जय श्रीराम