विश्वास की असली ताकत
एक छोटे से गाँव में मोहित नाम का आठवीं कक्षा का छात्र रहता था। वह पढ़ाई में ठीक था, लेकिन हर छोटी-बड़ी बात पर डर जाता था। परीक्षा आते ही कहता, “मैं पास नहीं हो पाऊँगा।” खेल प्रतियोगिता हो तो सोचता, “मैं जीत नहीं सकता।”
एक दिन स्कूल में नए शिक्षक आए। उन्होंने बच्चों से पूछा, “अगर तुम्हें एक ऊँची दीवार पार करनी हो तो सबसे पहले किस चीज़ की ज़रूरत होगी?”
किसी ने कहा—सीढ़ी, किसी ने कहा—रस्सी।
शिक्षक मुस्कुराए और बोले, “इन सबसे पहले ज़रूरत होती है अपने ऊपर और ईश्वर पर विश्वास की।”
अगले सप्ताह स्कूल में भाषण प्रतियोगिता थी। मोहित का नाम भी चुना गया। वह घबरा गया और बोला, “सर, मैं मंच पर नहीं जा सकता। सब मेरा मज़ाक उड़ाएँगे।”
शिक्षक ने उसे स्कूल के बगीचे में ले जाकर एक छोटा-सा बीज दिखाया और पूछा, “बताओ, इस छोटे से बीज में इतना बड़ा पेड़ बनने की ताकत कहाँ से आती है?”
मोहित चुप रहा।
शिक्षक बोले, “बीज को विश्वास होता है कि यदि वह मिट्टी में धैर्य से टिका रहेगा, पानी और धूप मिलेगी, तो एक दिन पेड़ बन जाएगा। अगर वह शुरुआत में ही हार मान ले, तो कभी अंकुर भी नहीं बन पाएगा।”
ये बात मोहित के दिल को छू गई। उसने रोज़ मेहनत शुरू की। हर सुबह पढ़ाई करने से पहले वह मन ही मन प्रार्थना करता, “हे भगवान! मैं पूरी मेहनत करूँगा, आप मुझे हिम्मत देना।”
प्रतियोगिता का दिन आया। मंच पर जाते समय उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन उसने आँखें बंद करके ईश्वर को याद किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ भाषण दिया।
परिणाम घोषित हुआ। मोहित प्रथम नहीं आया, लेकिन उसे “सर्वश्रेष्ठ आत्मविश्वास पुरस्कार” मिला। उसके शिक्षक ने कहा, “आज तुमने सबसे बड़ी जीत हासिल की है—अपने डर पर जीत।”
उस दिन मोहित समझ गया कि केवल चमत्कार की प्रतीक्षा करने से कुछ नहीं होता। जब मेहनत, आत्मविश्वास और ईश्वर पर सच्चा विश्वास एक साथ जुड़ जाते हैं, तब सफलता स्वयं रास्ता बना लेती है।
शिक्षा:ईश्वर हमेशा हमारी सहायता करते हैं, लेकिन तब जब हम स्वयं पूरी ईमानदारी से प्रयास करते हैं। जो विद्यार्थी मेहनत के साथ ईश्वर पर विश्वास रखते हैं, वे कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त कर सकते हैं।
याद रखें:मेहनत आपके हाथ में है, परिणाम ईश्वर के हाथ में। इसलिए पूरी लगन से प्रयास करें और विश्वास कभी मत छोड़ें।” 🌸
जय श्रीराम