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अनमोल धड़कनों ❤️का हिसाब

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अनमोल धड़कनों का हिसाब

एक छोटे से शहर में रहने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग का दिल का ऑपरेशन होना था। उम्र अधिक थी, लेकिन हौसला आज भी जवान था। परिवार वाले चिंतित थे, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने भरोसा दिलाया कि सब ठीक हो जाएगा।

ऑपरेशन लगभग 3 घंटे चला। आखिरकार डॉक्टर बाहर आए और मुस्कुराते हुए बोले, “ऑपरेशन सफल रहा।यह सुनते ही परिवार वालों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

कुछ दिन बाद बुजुर्ग पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले थे। तभी उन्हें अस्पताल का बिल थमाया गया — 8 लाख रुपये। बिल देखते ही उनकी आंखें भर आईं… हाथ थोड़े कांपने लगे। यह देखकर डॉक्टर तुरंत उनके पास आए और बोले, बाबा, आप चिंता मत कीजिए। अगर पैसे की परेशानी है तो हम बिल कम कर देंगे।

बुजुर्ग ने धीरे से सिर उठाया, हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “डॉक्टर साहब, मुझे इस बिल से कोई परेशानी नहीं है। अगर 10 लाख भी होता, तो भी मैं खुशी-खुशी दे देता।”

डॉक्टर हैरान रह गए — “तो फिर आप रो क्यों रहे हैं?”

बुजुर्ग की आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने आसमान की ओर देखा और बोले, “मैं इसलिए रो रहा हूं कि आपने मेरे दिल को सिर्फ 3 घंटे संभाला और उसका बिल 8 लाख रुपये हैलेकिन मेरे उस प्रभु ने, जिसने इस दिल को 80 साल तक हर पल, हर सांस के साथ संभालकर रखाउसने आज तक मुझसे एक भी रुपया नहीं मांगा।

कमरे में एक गहरा सन्नाटा छा गया। डॉक्टर और वहां मौजूद हर व्यक्ति उस बात की गहराई को महसूस कर रहा था।

बुजुर्ग ने आगे कहा, “हम जिंदगी में अक्सर छोटी-छोटी चीजों के लिए शिकायत करते हैं…लेकिन उस अनदेखी शक्ति का शुक्रिया करना भूल जाते हैं, जो हर पल हमें बिना किसी शर्त के संभाल रही है।”

उस दिन अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति की सोच बदल गई। क्योंकि उन्होंने समझ लिया था —कुछ चीजों का कोई मूल्य नहीं होतावे बस अनमोलहोती हैं।

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जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
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