lalittripathi@rediffmail.com
Quotes

अनुभव और सीख

3Views

अनुभव और सीख

बाजार क्षेत्र में मैं अपनी बाइक से सही साइड में चल रहा था। मेरे देवी जी और उनकी एक साथी भी थीं। सामने से दो युवक रॉन्ग साइड से बाइक लेकर आ रहे थे। उनकी बाइक के बीचों-बीच लगभग छह फीट चौड़ा पारदर्शी कांच रखा हुआ था, जो एक नज़र में दिखाई नहीं दे रहा था।

सामने से बाइक आते देख मैंने स्वाभाविक रूप से अपनी बाइक साइड में ली, लेकिन उससे पहले ही उनकी बाइक मेरे पास आ गई और मेरी बाइक के साइड ग्लास से वह कांच टकरा गया। कांच टूट गया, मैं आगे चलकर  बाइक को रोका और सबसे पहले यह देखा कि किसी को चोट तो नहीं लगी।

तभी स्थिति अचानक बदल गई। कुछ ही देर में सामने वाले युवकों के परिचित लोग इकट्ठा होने लगे जानें हमेशा देखते हैं वहीं हुआ……देखते ही देखते भीड़ बन गई और मुझे घेर लिया गया। आसपास से कई लोग गुजर रहे थे, लेकिन अधिकांश मूक दर्शक बने रहे।

मेरे साथ मौजूद दोनों महिलाओं ने साहस दिखाया और स्थिति संभालने का प्रयास किया।

इसी दौरान कुछ सज्जन और जागरूक लोग रुके। उन्होंने मुझसे पूरी बात पूछी।

मैंने सच्चाई बताई। उन्होंने बीच-बचाव किया, समझाइश दी और माहौल को शांत करने में सहयोग किया। शुरुआत में सामने वाले जो हमेशा  भीड़ लगाकर तनाव बनाते हुए हमे दबाव में लेते हैं, अंततः बातचीत और समझाइश के बाद मामला नाममात्र की राशि देकर विवाद समाप्त हुआ

इस घटना मनमाने देखा ओर महसूस किया कि  ……जो लोग समर्थन और सहयोग के लिए रुके थे , वे सभी साहसी, सजग और स्पष्ट विचार वाले व्यक्ति थे। उन सभी के किसी के ललाट पर तिलक था तो किसी।के बिंदिया तिलक टैक्सी के सिर पर चुटिया थीं , या फिर किसी के गले में भगवा गमछा लगा था।

इन भाइयों ने बीच बचाव का रास्ता अपनाया और बात नहीं बनने पर अपने तेवर ऐसे थे कि बात बन जाए और बन गई जबकि बाकी लोग जल्दबाजी में निकलते रहे और रुकना भी उचित नहीं समझा।

कुलमिलाकर जब भी कोई व्यक्ति भीड़ में उलझ जाए…….अपनी क्षमता अनुसार उसके साथ खड़े हों । शांतिपूर्ण समाधान में मदद करें । तमाशबीन या केवल वीडियो बनाने वाली भीड़ का हिस्सा न बनें । कल कुछ जागरूक लोगों ने यही किया और उसी से स्थिति बिगड़ने से बच गई।

ऐसे साहसी और सजग भगवा , तिलक चुटिया धारी नागरिकों को हृदय से धन्यवाद बहुत बहुत साधुवाद ।

समाज में जागरूकता, एकजुटता और जिम्मेदारी की भावना हमेशा बनी रहनी चाहिए…..क्योंकि…..जब हम बँट जाते हैं तो कमजोर पड़ते हैं, और जब साथ खड़े होते हैं तो सुरक्षित रहते हैं।

कहानी अच्छी लगे तो Like और Comment जरुर करें। यदि पोस्ट पसन्द आये तो Follow & Share अवश्य करें ।

जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

Leave a Reply