पशुओं और पक्षियों का युद्ध
एक बार जंगल के पशुओं और पक्षियों में किसी बात को लेकर अनबन हो गई। युद्ध छिड़ गया। पशुओं की लंबी-चौड़ी सेना थी, जिसमें राजा शेर के अतिरिक्त लोमड़ी, भेड़िया, भालू, जिराफ, सियार, खरगोश आदि थे। पक्षियों की सेना भी कुछ कम न थी, उसमें चील, गिद्ध, कौवा, कबूतर, मैना, तोता सहित कई पक्षी सम्मिलित थे।
जंगल में एक चमगादड़ भी था, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि किसकी सेना में सम्मिलित हो। जब पक्षी उसे आमंत्रित करने आए तो उसने कहा, मैं तुम्हारे साथ कैसे आ सकता हूं? पंख हटा दिया जाएं, तो मैं हूबहू चूहे के समान दिखता हूं। मैं तो पशु हूं। जब पशुओं की मंडली आई तो चमगादड़ बोला, तुम्हें मेरे पंख दिखाई नहीं पड़ते। मैं तो पक्षी हूं।
कुछ समय बाद पशु पक्षियों में मित्रता हो गई। सभी आनंद मनाने लगे। लेकिन चमगादड़ को किसी ने भी अपने उत्सव में सम्मिलित करना जरूरी नहीं समझा।
मोरल ऑफ द स्टोरी: जरूरत पड़ने पर दूसरों का साथ दें। स्वार्थी का कोई मित्र नहीं होता।
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जय श्रीराम