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जीवन का असली सत्य: एक चिंतन

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जीवन का असली सत्य: एक चिंतन

​हाल ही में वेदांता ग्रुप जिसकी मार्केट वैल्यूएशन 1.60 लाख करोड़ है, के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के सुपुत्र अग्निवेश के 49 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट सेअसमय निधन की खबर ने हम सबको एक बहुत बड़ा और कड़वा सबक सिखाया है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि हम चाहे कितना भी बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लें, नियति के आगे हम सब नतमस्तक हैं।
​जिस बेटे के कंधों पर अरबों खरबों का कारोबार सौंपने की तैयारी थी, आज वही कंधे दुनिया छोड़ गए। यह बताता है कि हम भविष्य की कितनी भी बड़ी योजना बना लें, जीवन केवल ‘आज’ में है।

हम दिन-रात पैसा, रूतबा और संपत्ति बढ़ाने की दौड़ में लगे रहते हैं, लेकिन अंत में हाथ कुछ नहीं आता। सिकंदर हो या कोई अरबपति, विदाई खाली हाथ ही होती है। बड़ी गाड़ियाँ और महल सुख दे सकते हैं, लेकिन शांति और संतुष्टि केवल अपनों के साथ बिताए गए पलों से मिलती है।

संदेश:मेहनत जरूर करें, लक्ष्य भी हासिल करें, लेकिन इस दौड़ में अपनों को और खुद को पीछे न छोड़ें। याद रखें, आप अपने परिवार के लिए केवल एक “कमाऊ सदस्य” नहीं हैं, आप उनके लिए पूरी दुनिया हैं।
​”दौड़ना जरूरी है, पर इतना भी तेज मत दौड़िए कि पीछे मुड़ने पर परिवार ही दिखाई न दे।”

​आइए, आज से थोड़ा समय अपनों को दें, स्वास्थ्य पर ध्यान दें और इस पल का आनंद लें। क्योंकि जीवन का अंत कब है, यह न दौलत जानती है और न ही विज्ञान।

जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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