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श्रेष्ठ पथ पे सदैव चलें

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श्रेष्ठ पथ पे सदैव चलें

इस दुनिया में सबको एक साथ संतुष्ट करना कभी भी और किसी के लिए भी आसान व संभव नहीं रहा। ऐसा कोई अच्छा कार्य नहीं जो आप करो और कुछ लोगों के लिए वो प्रेरणा न बन सके तो ऐसा भी कोई कार्य नहीं जो आप करो और दूसरे उसमें गलती न निकालें।

भगवान सूर्य नारायण उदित होते हैं तो कमल के पुष्प प्रसन्न होकर खिल खिलाने लगते हैं। वहीं दूसरी ओर उलूक पक्षी आँख बंद करके बैठ उसी मंगलमय प्रभात को कोसने लगता है, कि ये नहीं होता तो मैं स्वच्छंद विचरण करता।

हताश और निराश होने के बजाय ये सोचकर आप अपना श्रेष्ठतम, सर्वोत्तम और महानतम सदा समाज को देते रहने के लिए प्रतिबद्ध रहें कि निंदा और आलोचना से देवता नहीं बच पाये तो हम क्या चीज हैं..? कहने वाले कभी नहीं थकते, आप उन सबकी परवाह किए बिना श्रेष्ठ पथ पर बढ़ते रहें ।

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जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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