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हृदय से क्षमा

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हृदय से क्षमा

समाप्त होते वर्ष 2025 में, मेरे मन, कर्म और वाणी से यदि जाने-अनजाने किसी को ठेस पहुँची हो, किसी का दिल दुखा हो, किसी की उम्मीद टूट गई हो – तो मैं हृदय से क्षमा माँगता हूँ।

हम सब इंसान हैं, गलतियाँ हो जाती हैं, पर साल के अंत में दिल हल्का करना और माफ़ी माँग लेना भी एक अच्छी शुरुआत होती है।

नए वर्ष में न कोई बोझ हो, न कोई कड़वाहट बस साफ़ मन और सच्चा दिल क्योंकि नया साल तभी अच्छा होगा, जब पुराने गिले-शिकवे छोड़कर दिल हल्का करके आगे बढ़ा जाए।

आप समस्त आदरणीय को नव वर्ष की शुभकामनाएं

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जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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