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जय श्री राधे कृष्ण …..

” ये दुनियां ठीक वैसी है जैसी हम इसे देखना पसंद करते हैं! यहाँ पर किसी को गुलाब में काँटे नजर आते हैं तो किसी को काँटों में गुलाब….!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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