वास्तविक सौंदर्य
बाहर से रुपवान होना बड़ी बात नहीं है अपितु भीतर से गुणवान होना बहुत बड़ी बात है। केवल बाहरी सौंदर्य ही श्रीकृष्ण को श्रीकृष्ण नहीं बनाता अपितु उनकी उदारता और उनकी कारुण्यता ही उन्हें सहज आकर्षक बनाती है।
सामान्य दृष्टि में चित को जो आकर्षित कर दे वही श्रीकृष्ण है। सबके चित को सहज आकर्षित करने वाला ही श्रीकृष्ण है। भगवान श्रीकृष्ण ने केवल वाह्य आकर्षण से दुनिया को मोहित नहीं किया अपितु अपने आंतरिक सौंदर्य से भी सबके मन का हरण किया है।
श्रीकृष्ण बनने के लिए बाहर का श्रृंगार आवश्यक नहीं अपितु भीतर का परिमार्जन आवश्यक हो जाता है। केवल वाह्य सौंदर्य में अटक जाना ही संसार में भटकाव का कारण भी बन जाता है।
!!!…रुपयों से कोई रईस नहीं होता, चरित्र और स्वभाव से होता है…!!!
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जय श्रीराम
16 कला संपूर्ण श्री कृष्ण विश्व के सबसे सुंदर और महान व्यक्ति हुए है, उनका सानी न कोई हुआ है और न कोई होगा