lalittripathi@rediffmail.com
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-305

141Views

जय श्री राधे कृष्ण …..

लछिमन बान सरासन आनू, सोषौं बारिधि बिसिख कृसानू, सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीती, सहज कृपन सन सुंदर नीती ।।

भावार्थ:– हे लक्ष्मण ! धनुष – बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सोख डालूँ । मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुंदर नीति (उदारता का उपदेश)…..!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

Leave a Reply