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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-298

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जय श्री राधे कृष्ण …..

सुनत सभय मन मुख मुसकाई, कहत दसानन सबहि सुनाई, भूमि परा कर गहत अकासा, लघु तापस कर बाग बिलासा ।।

भावार्थ:– पत्रिका सुनते ही रावण मन में भयभीत हो गया, परंतु मुख से (ऊपर से) मुस्कुराता हुआ वह सबको सुना कर कहने लगा – जैसे कोई पृथ्वी पर पड़ा हुआ हाथ से आकाश को पकड़ने की चेष्टा करता हो, वैसे ही यह छोटा तपस्वी (लक्ष्मण) वाग्विलास करता है (डींग हांकता है) ….. ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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