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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-296

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जय श्री राधे कृष्ण …..

“*रामानुज दीन्हीं यह पाती, नाथ बचाइ जुडा़वहु छाती, बिहसि बाम कर लिन्हीं रावन, सचिव बोलि सठ लाग बचावन ।।

भावार्थ:– (और कहा) श्री राम जी के छोटे भाई लक्ष्मण ने यह पत्रिका दी है । हे नाथ! इसे बचवा कर छाती ठंडी कीजिए । रावण ने हँस कर उसे बाएँ हाथ से लिया और मंत्री को बुलाकर वह मूर्ख उसे बँचाने लगा…… ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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