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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-295

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जय श्री राधे कृष्ण …..

सचिव सभीत बिभीषन जाकें, बिजय बिभूति कहाँ जग ताकें, सुनि खल बचन दूत रिस बाढ़ी, समय बिचारि पत्रिका काढ़ी ।।

भावार्थ:– जिसके विभीषण जैसा डरपोक मंत्री हो, उस के लिए संसार में विजय और विभूति (ऐश्वर्य) कहाँ । दुष्ट रावण के वचन सुन कर दूत का क्रोध बढ़ गया। उसने अवसर जान कर लक्ष्मण द्वारा दी गई पत्रिका निकाली….!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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