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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-270

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जय श्री राधे कृष्ण …..

प्रथम प्रनाम कीन्ह सिरु नाई, बैठे पुनि तट दर्भ डसाई, जबहिं बिभीषन प्रभु पहिं आए, पाछें रावन दूत पठाए ।।

भावार्थ:– उन्होंने पहले सिर नवा कर प्रणाम किया। फिर किनारे पर कुश बिछा कर बैठ गए। इधर ज्यों ही विभीषण जी प्रभु के पास आए थे, त्यों ही रावण ने उनके पीछे दूत भेजे थे…..!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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