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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-237

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जय श्री राधे कृष्ण …..

“उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत, जय कृपाल कहि कपि चले अंगद हनू समेत ।।

भावार्थ:– कृपा के धाम श्री राम जी ने हँस कर कहा – दोनों ही स्थितियों में उसे ले आओ । तब अंगद और हनुमान सहित सुग्रीव जी ‘कृपालु श्री राम जी की जय हो’ कहते हुए चले……. ।

दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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