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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-141

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जय श्री राधे कृष्ण …….

ता कर दूत अनल जेहिं सिरजा, जरा न सो तेहि कारन गिरिजा, उलटि पलटि लंका सब जारी, कूदि परा पुनि सिंधु मझारी ।।

भावार्थ:- (शिव जी कहते हैं) हे पार्वती! जिन्होंने अग्नि को बनाया, हनुमान जी उन्हीं के दूत हैं । इसी कारण वे अग्नि से नहीं जले । हनुमान जी ने उलट – पलट कर (एक ओर से दूसरी ओर तक) सारी लंका जला दी । फिर वे समुद्र में कूद पड़े…… ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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