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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-89

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जय श्री राधे कृष्ण …….

निसिचर मारि तोहि लै जैहहिं, तिहुँ पुर नारदादि जसु गैहहिं, हैं सुत कपि सब तुम्हहि समाना, जातुधान अति भट बलवाना…..”!

भावार्थ:- और राक्षसों को मार कर आप को ले जाएंगे । नारद आदि (ऋषि – मुनि) तीनों लोकों में उन का यश गावेंगे । (सीता जी ने कहा) हे पुत्र ! सब वानर तुम्हारे ही समान (नन्हे नन्हे से) होंगे, राक्षस तो बड़े बलवान योद्धा हैं…..!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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