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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-87

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जय श्री राधे कृष्ण …….

जौं रघुबीर होति सुधि पाई, करते नहिं बिलम्ब रघुराई, राम बान रबि उएं जानकी, तम बरुथ कहं जातुधान की….!!

भावार्थ:- श्री राम चंद्र जी ने यदि खबर पाई होती, तो वे विलम्ब न करते । हे माता जानकी ! राम बाण रूपी सूर्य के उदय होने पर राक्षसों की सेना रूपी अंधकार कहां रह सकता है ?….!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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