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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-74

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जय श्री राधे कृष्ण …….

नर बानरहि संग कहु कैसें, कही कथा भइ संगति जैसें….!!

भावार्थ:- (सीता जी ने पूछा-) नर और वानर का संग कहो कैसे हुआ ? तब हनुमान जी ने जैसे संग हुआ था, वह सब कथा कही ।।

कपि के बचन सप्रेम सुनि, उपजा मन बिस्वास, जाना मन क्रम बचन यह कृपासिंधु कर दास….!!

भावार्थ:- हनुमान जी के प्रेम युक्त वचन सुन कर सीता जी के मन में विश्वास उत्पन्न हो गया । उन्होंने जान लिया कि यह मन वचन और कर्म से कृपा सागर श्री रघुनाथ जी का दास है.. ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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