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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-63

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जय श्री राधे कृष्ण …….

“आनि काठ रचु चिता बनाई, मातु अनल पुनि देहि लगाई, सत्य करहि मम प्रीति सयानी, सुनै को श्रवन सूल सम वानी…..!!

भावार्थ:- काठ लाकर चिता बना कर सजा दे। हे माता! फिर उसमें आग लगा दे। हे सयानी! तू मेरी प्रीति को सत्य कर दे। रावण के शूल के समान दु:ख देनेवाली वाणी कानो से कैसे सुनें ?…..!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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