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जय श्री राधे कृष्ण ……..
” “कोयल” अपनी भाषा बोलती है इसलिये आज़ाद रहती हैं। किंतु तोता दूसरे कि भाषा बोलता है, इसलिए पिंजरे में जीवन भर गुलाम रहता है। अपनी भाषा,अपना धर्म और अपने आप पर विश्वास करना चाहिए…..!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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