रणछोड़ श्रीभगवान
आज रूस युक्रेन युद्ध और निर्दोषों की मृत्यु को देखकर यह बात समझ में आ जाए …या ईरान इज़रायल के युद्ध को .._
रणछोड़, श्री भगवान की एक अद्भुत लीला है ।
श्री भगवान ने मथुरा छोड़ने के पूर्व मथुरा के लोगों को यही कहा था की युद्ध केवल दो कारणों से किया जा सकता है।
पहला, जब सद् संमप्रदाय पर आक्रमण हो, अर्थात् गौ, धर्म इत्यादि पर हमला हो। और दूसरा जब एक राजा, किसी दूसरे देश को अपने अधीन करना चाहता हो।
जरासंध न तो सत् संमप्रदाय का नाश कर रहा था और न ही मथुरा को अपने अधीन करना चाहता था। उसकी व्यक्तिगत शत्रुता, मेरे से है …
श्री भगवान, रणछोड़ बनकर यही शिक्षा देते हैं की व्यक्तिगत कारणों से युद्ध न करके, केवल सद् संप्रदाय और राष्ट्र की रक्षा के लिए ही युद्ध किया जाए।
अतः यह रणछोड़, श्री भगवान का अद्भुत स्वरूप है।
श्री भगवान ने बाद में अवसरोचित समय आने पर जरासंध का वध भी करवाया है, बिना मथुरा को क्षति पहुचाए। बिना मथुरा की जनता को कष्ट में डाले। और सारें विधर्मियों को रणछोड़ करते हुये इकट्ठा भी कर डाले …
रणछोड़ का अर्थ हम सबने ठीक ठीक समझा होगाऔर इसका भागने भूगने से कोई संबंध नहीं निकालेंगे ।
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जय श्रीराम