गधे ने दी सिंह को चुनौती
एक गधे ने सिंह को चुनौती दे दी और कहा : अगर हो हिम्मत तो आ मैदान में और हो जाए सीधा युद्ध ..!! लेकिन सिंह चुपचाप चला गया।
सियार यह सुन रहा था। उसने थोड़ा आगे बढ़ कर सिंह को पूछा कि सम्राट, बात क्या है .??? एक गधे की चुनौती को भी आप स्वीकार नहीं किए..??
सिंह ने कहा पागल हुआ है.??? अगर उसकी चुनौती मैं स्वीकार करूं, तो पहले तो अफवाह उड़ जाएगी कि सिंह गधे से लड़ा..!! यह बदनामी होगी। ऐसा कभी हुआ नहीं। यह हमारे कुल, वंश, परंपरा में नहीं हुआ कि गधे से लड़े .!!!!
लड़ना है गधे से, गधे को समाप्त कर दे सकते हैं, लड़ना क्या है? अगर गधा हारा तो उसका कोई अपमान नहीं है। हम जीते भी तो कोई सम्मान नहीं..!! लोग कहेंगे, क्या जीते, गधे से जीते .!!
और कहीं भूल—चूक से जीत गया गधा—गधे हैं इनका भरोसा क्या—तों हम सदा के लिए मारे गए। इसलिए मैं चुपचाप चला आया हूं। गधे से झंझट में पड़ना ठीक नहीं है..!!!
छोटे से अगर आप उलझेंगे , जीते भी तो छोटे से जीते ..!! और काश अगर हार गए, तो छोटे से हारे .!!!
.. इसलिये दुश्मन जरा सोच कर चुनिये ..!! मित्र तो कोई भी चल जाएगा, शत्रु जरा सोच कर चुने ..!!… शत्रु सदैव जरा बड़ा होना चाहिये क्योंकि चुनौती, संघर्षण आपको अवसर देगा, आपके अपने आत्म—विकास का..!!
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जय श्रीराम