एकता की शक्ति
एक समय की बात है, एक धनी व्यापारी अपनी कार से किसी व्यापारिक यात्रा पर जा रहा था। मार्ग में चलते-चलते अचानक उसकी गाड़ी एक गहरे कीचड़ वाले गड्ढे में धँस गई। उसने बहुत प्रयास किया, पर गाड़ी टस से मस नहीं हुई। आसपास न कोई व्यक्ति, न कोई वाहन। व्यापारी असहाय-सा खड़ा सोचने लगा कि अब क्या करे।
कुछ देर बाद उसने दूर खेत में एक किसान को देखा, जो अपने बैल के साथ काम कर रहा था। व्यापारी ने उसे आवाज लगाई,
“भाई साहब! ज़रा मदद कर दीजिए, मेरी गाड़ी इस कीचड़ में फँस गई है।”
किसान बोला, “चिंता मत कीजिए, साहब! मेरा बैल ‘प्यारे’ बहुत ताकतवर है। वह आपकी गाड़ी निकाल देगा।”
किसान अपने बैल को ले आया और रस्सी से गाड़ी को बाँध दिया। फिर उसने ज़ोर-ज़ोर से पुकारना शुरू किया—
“चलो बंधु, ज़रा जोर लगाओ!
अरे कान्हा, अब तुम्हारे भरोसे हैं! भोले, पीछे मत हटना!
प्यारे, पूरी ताकत लगा दो!”
किसान लगातार अलग-अलग नाम पुकारता रहा, और कुछ ही देर में वह बूढ़ा बैल अपनी पूरी ताकत लगाकर गाड़ी को बाहर खींच लाया।
व्यापारी बहुत प्रसन्न हुआ। उसने किसान के हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया और बोला,
“भाई, मैं एक बात पूछना चाहता हूँ, बुरा मत मानना।”
किसान मुस्कुराकर बोला, “पूछिए साहब।”
व्यापारी ने कहा, “आपने शुरुआत में कहा कि आपके बैल का नाम ‘प्यारे’ है, लेकिन आपने उसे बंधु, कान्हा और भोले जैसे कई नामों से पुकारा। आखिर ऐसा क्यों?”
किसान हँसते हुए बोला,
“साहब, असल में मेरा प्यारे बहुत बूढ़ा है और अंधा भी। उसे अपनी आँखों से कुछ दिखाई नहीं देता। अगर मैं उसे अकेले का एहसास होने दूँ तो वह डर जाता है और कमजोर पड़ जाता है। इसलिए मैं उसे ऐसे बुलाता हूँ जैसे कई बैल साथ काम कर रहे हों। जब प्यारे को लगता है कि वह अकेला नहीं है, तब वह अपनी पूरी शक्ति झोंक देता है — और हर कठिन काम आसान हो जाता है।”
व्यापारी किसान की बात सुनकर गहरे विचार में डूब गया। उसे समझ आ गया कि यह केवल एक बैल की कहानी नहीं है, बल्कि जीवन का गूढ़ सत्य है — “जब इंसान को यह एहसास होता है कि वह अकेला नहीं है, तब उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।”
हम सब भी जब किसी टीम में कार्य करते हैं, तो हमें यह विश्वास रहता है कि हमारे साथी हमारे साथ हैं। यही भावना हमें आत्मबल देती है। जब हर व्यक्ति “हम” की भावना से काम करता है, तो असंभव लगने वाला कार्य भी सहज हो जाता है।
इसीलिए कहा गया है —
जब सब साथ होते हैं, तो हर कोई अधिक प्राप्त करता है।
सच्चे अर्थों में —
साथ आना आरंभ है,
साथ चलना प्रगति है,
और साथ रहकर कार्य करना — यही सफलता है।
तो क्यों न हम यह मान लें कि यह समूचा संसार भी एक विशाल टीम है —
“सृष्टि के रचयिता की टीम!”
✨ एकता में ही शक्ति है, और यही सफलता की कुंजी है। ✨
जय श्री राम