lalittripathi@rediffmail.com
Quotes

मृत्यु की 4 चिट्ठियाँ

72Views

मृत्यु की 4 चिट्ठियाँ

आप जानते हैं कि मृत्यु (काल) कभी अचानक नहीं आती? वह आने से पहले हमें संकेत (चिट्ठियाँ) भेजती है, लेकिन हम मोह और लोभ में पड़कर उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

एक पुरानी कथा के अनुसार, एक चतुर व्यक्ति को मृत्यु से बहुत डर लगता था। उसने चतुराई से ‘काल’ (मृत्यु के देवता) से मित्रता कर ली। उसने काल से कहा- “मित्र, जब भी मुझे लेने आना, तो उससे कुछ दिन पहले एक चिट्ठी जरूर भेज देना, ताकि मैं अपने परिवार को सब समझा सकूँ और भगवान के भजन में लग जाऊँ।” काल ने मुस्कुराकर कहा- “ठीक है मित्र, मैं तुम्हें एक नहीं, 4 चिट्ठियाँ भेजूँगा!”

     व्यक्ति निश्चिंत हो गया कि अब मृत्यु का कोई डर नहीं। दिन बीतते गए। अचानक एक दिन काल अपने दूतों के साथ आ धमका और बोला- “मित्र, तुम्हारा समय पूरा हुआ, चलो!”

व्यक्ति क्रोधित हो गया- “धिक्कार है तुम्हारी मित्रता पर! तुमने तो कहा था कि आने से पहले चिट्ठी भेजोगे? तुमने तो एक भी नहीं भेजी!”

  काल हँसा और बोला- “मित्र, इतना झूठ तो न बोलो! मैंने एक नहीं, पूरे 4 पत्र भेजे थे, जो इस समय भी तुम्हारे पास मौजूद हैं:”

पहली चिट्ठी (सफ़ेद बाल): मैंने तुम्हारे काले बालों को सफ़ेद किया, ताकि तुम समझ जाओ कि उम्र ढल रही है और भजन-सिमरन में लग जाओ। लेकिन तुमने बालों को रंगकर फिर से काला कर लिया और सच्चाई को अनदेखा कर दिया।

दूसरी चिट्ठी (कमज़ोर आँखें): कुछ समय बाद तुम्हारी आँखों की रोशनी कम होने लगी। यह संकेत था कि अब दुनिया को देखना कम करो और अंतर्मन से प्रभु को देखो। लेकिन तुमने आँखों पर मोटा चश्मा चढ़ा लिया।

तीसरी चिट्ठी (टूटते दाँत): फिर तुम्हारे दाँत हिलने और टूटने लगे। यह संदेश था कि अब भौतिक सुखों और स्वाद का मोह छोड़ दो। लेकिन तुमने नकली दाँत लगवा लिए।

चौथी चिट्ठी (रोग और पीड़ा): अंत में मैंने बीमारियों और शारीरिक पीड़ा को भेजा। लेकिन तुमने अहंकार और दवाइयों के बल पर इसे भी अनसुना कर दिया।

यह सुनकर वह व्यक्ति फूट-फूट कर रोने लगा। उसने काल को अपनी करोड़ों की संपत्ति का लालच दिया।

     काल ने कहा- “धन और लोभ संसारियों को वश में कर सकता है, मुझे नहीं! मेरे लिए यह धूल है। यदि मुझे लुभाना ही था, तो सच्चाई और शुभ कर्मों का धन इकट्ठा करते।” काल ने उसके प्राण हर लिए और अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा।

        कहानी का सार: हम हमेशा सोचते हैं कि “कल से भगवान का नाम लेंगे” या “कल से अच्छे काम करेंगे”, लेकिन वह कल कभी नहीं आता। शरीर में होने वाले बदलाव ही काल की चिट्ठियाँ हैं। समय रहते जागिए, शुभ कर्म कीजिए और ईश्वर का स्मरण कीजिए।

हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे।

हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे।।

कहानी अच्छी लगे तो Like और Comment जरुर करें। यदि पोस्ट पसन्द आये तो Follow & Share अवश्य करें ।

जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

Leave a Reply