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अपना कार्य

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अपना कार्य

एक धोबी के पास एक गधा और एक कुत्ता था। गधा धोबी के कपड़े धोबीघाट तक लेकर जाता, धोबी कपड़े धोकर गधे पर लादता और फिर गधा उसे लेकर घर आता। कुत्ते का काम था घर की रखवाली करना। एक दिन की बात है धोबी कुत्ते को खाना देना भूल गया। इस बात पर कुत्ता बहुत नाराज हो गया।

संयोग की बात यह हुई कि उसी रात धोबी के घर चोर आ गया। धोबी और कुत्ते दोनों ने ही चोर को आते हुए देख लिया। कुत्ता अपने मालिक से नाराज था तो वह नहीं भौंका। गधे ने कुत्ते से कहा- अरे तुम भौंकते क्यों नहीं?

गधे की बात सुनकर कुत्ते ने कहा- मालिक तो हमें समय पर खाना भी नहीं देता। आज मैं अगर नहीं भौंकूंगा तो ही उन्हें मेरी कद्र होगी। गधे ने कहा- तुम कैसे नाशुक्रे हो। तुम्हारा फर्ज है कि तुम अभी मालिक के काम आओ। कुत्ता अड़ गया और नहीं भौंका। गधे ने सोचा, ‘अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा और अगर मालिक जाग गया तो शायद मुझे इनाम भी मिल जाए।गधा जोर-जोर से ढेंचू-ढेंचू करने लगा।

धोबी दिन भर काम करके थका हुआ था। गधे की आवाज सुनकर उसकी नींद तो खुल गई, लेकिन उसे बहुत गुस्सा आया। उसने अपने बेटे को बुलाया और गधे को खूब पीटा। गधे को पीटकर वह फिर सो गया।

सुबह जगा तो घर का सारा सामान गायब पा कर उसे समझते देर न लगी कि रात गधा क्यूँ ढेंचू-ढेंचू कर रहा था। लेकिन अब उसे गुस्सा कुत्ते पे आया ! अगर कुत्ते ने भौंका होता तो चोरी भी नहीं होती और बेचारे गधे को मार भी नहीं पड़ती ! गुस्से में बौखलाया किसान वही रात बाला डंडा उठाया और कुत्ते पर भी दोहरा बजा दिया। गधा समझ नहीं पाया, लेकिन आप तो समझदार हो ! तो समझे कि नहि ?

अजी ! भौंकना कुत्ते का काम था, लेकिन गधे ने वो किया इसलिए उस पर डंडे बजे और कुत्ते ने गधे वाला काम किया इसलिए उसे भी डंडे पड़े !

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जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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