सुविचार
जय श्री राधे कृष्ण ….. " हमारा दिमाग इस दुनिया का सबसे बडा इच्छापूर्ती वृक्ष है इससे जो भी मांगोगे ये उसे पुरा करने में लग जायेगा इसलिये सदैव इससे सकारात्मक ही मांगें..!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " हमारा दिमाग इस दुनिया का सबसे बडा इच्छापूर्ती वृक्ष है इससे जो भी मांगोगे ये उसे पुरा करने में लग जायेगा इसलिये सदैव इससे सकारात्मक ही मांगें..!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण...
नागा साधु/ संप्रदाय नागा शब्द बहुत पुराना है। भारत में नागवंश और नागा जाति का इतिहास भी बहुत पुराना है। भारत में नागालैंड नाम का एक स्थान है। भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में ही नागवंशी, नागा जाति और दसनामी संप्रदाय...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " कहानी जिंदगी की यही हैं…… इसमे मनचाहा किरदार नही मिलता है बस हमारा प्रयास यह रहना चाहिए की किरदार दिल से निभाए और यादगार बना देवे ..!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण...
अर्ध कुंभ से महा कुंभ कुंभ मेला:- कुंभ मेला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो हर 12 वर्ष में आयोजित किया जाता है....यह मेला चार अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किया जाता है.... हरिद्वार, इलाहाबाद, उज्जैन और नासिक... अर्ध कुंभ मेला:-अर्ध...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " ईश्वर ने दूसरों को क्या दिया है, यह देखने में हम इतने व्यस्त होते हैं की; ईश्वर ने हमें क्या दिया है, वो देखने का हमें वक़्त ही नहीं होता है..!! सुप्रभात आज का...
मन चंगा तो कठौती में गंगा एक समय की बात है। एक परिवार में पति-पत्नी और उनके बेटे-बहू रहते थे। सबका जीवन सुख-शांति से चल रहा था। कुछ वर्षों बाद सास-ससुर ने गंगा स्नान करने का विचार बनाया। उन्होंने तय...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " नियत ही नियति तय करती है,साहस वह ताकत है जिससे डर को भी डर लगता है…!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
सकारात्मक सोच महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी तब वो बड़े दुःखी रहते थे...पर ऐसे समय में उनको एक ही बात से हौंसला मिलता था जो कभी उन्हें आशाहीन नहीं होने देता था...और वह था श्रवण...
जय श्री राधे कृष्ण ….. " इंसान की इंसानियत उसी समय समाप्त हो जाती है, जब उसे दूसरों के दुख से हंसी आने लगती है…..!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
परमहंस हमने ज्ञानियों को परमहंस कहा है। इसके दो कारण हैं। एक तो हंस सार को असार से अलग कर लेता है, और दूसरा, हंस सभी दिशाओं, तीनों आयामों में गतिवान है। वह जल में तैर सकता है, जमीन पर...